
डॉ. स्वाति श्रीवास्तव के परिश्रम और एसोसिएशन ऑफ लेडी एंटरप्रेन्योर ऑफ इंडिया के सहयोग की सराहना
नई दिल्ली। अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति की महिला उद्यमिता अब देश की सीमाओं से निकलकर वैश्विक बाजार में अपनी पहचान बना रही है। दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अनुसार इस वर्ष 24 सितंबर तक 61 एससी-एसटी महिला उद्यमियों ने 32 देशों में पहुंचकर अपने उत्पादों का प्रदर्शन किया। विदेशी बाजारों में भारतीय उत्पादों की प्रस्तुति और व्यापारिक संभावनाओं की तलाश महिला उद्यमियों के बढ़ते आत्मविश्वास और आर्थिक सशक्तीकरण की तस्वीर प्रस्तुत करती है।
एसोसिएशन ने इस उपलब्धि के पीछे मुख्यालय की सीएफएम डॉ. स्वाति श्रीवास्तव के परिश्रम तथा एसोसिएशन ऑफ लेडी एंटरप्रेन्योर ऑफ इंडिया के सहयोग को सराहनीय बताया है। संगठन का कहना है कि महिला उद्यमियों को केवल व्यवसाय शुरू करने तक सीमित न रखकर उन्हें देश-विदेश के बाजारों से जोड़ना समय की आवश्यकता है।
विदेशी बाजार तक पहुंच का रास्ता खोल रही अंतरराष्ट्रीय सहयोग योजना
सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय की अंतरराष्ट्रीय सहयोग योजना ऐसे उद्यमियों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती है, जो अपने उत्पादों को विदेशी बाजार तक पहुंचाना चाहते हैं। योजना के अंतर्गत व्यापार मेलों, अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों, खरीदार-विक्रेता बैठकों तथा अन्य व्यापारिक आयोजनों में भागीदारी को प्रोत्साहित किया जाता है।
योजना के अंतर्गत बाजार विकास सहायता के माध्यम से उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक आयोजनों में भाग लेने का अवसर मिलता है। वहीं पहली बार निर्यात करने वाले सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों की क्षमता विकास सहायता के माध्यम से निर्यात संबंधी प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और पात्र खर्चों की प्रतिपूर्ति जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजारों की जानकारी उपलब्ध कराने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार सूचना प्रसार का भी प्रावधान है। इसका उद्देश्य उद्यमियों को विभिन्न देशों में व्यापार की संभावनाओं और बाजार की आवश्यकताओं से परिचित कराना है।
₹25,060 करोड़ का निर्यात प्रोत्साहन मिशन, छोटे उद्यमों पर विशेष ध्यान
केंद्र सरकार ने निर्यात को बढ़ावा देने के लिए ₹25,060 करोड़ के निर्यात प्रोत्साहन मिशन को मंजूरी दी है। यह मिशन वित्त वर्ष 2025-26 से 2030-31 तक छह वर्षों के लिए है। इसमें सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, पहली बार निर्यात करने वाले उद्यमियों तथा श्रम आधारित उद्योगों को सहायता देने पर विशेष ध्यान दिया गया है।
मिशन के अंतर्गत निर्यात प्रोत्साहन और निर्यात दिशा दो प्रमुख भाग हैं। इनके माध्यम से व्यापार के लिए वित्तीय सहायता, निर्यात ऋण, बाजार विस्तार, गुणवत्ता प्रमाणन, ब्रांड निर्माण, पैकेजिंग, व्यापार मेलों में भागीदारी, भंडारण, परिवहन, बाजार संबंधी जानकारी तथा कौशल विकास जैसे क्षेत्रों में सहायता उपलब्ध कराने की व्यवस्था की गई है।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन का कहना है कि छोटे उद्यमियों के लिए अब वैश्विक बाजार के दरवाजे पहले की तुलना में अधिक खुले हैं। उत्पाद की गुणवत्ता, आकर्षक पैकेजिंग, आवश्यक प्रमाणन और विदेशी बाजार की मांग की समझ विकसित करके उद्यमी अपने व्यवसाय को अंतरराष्ट्रीय स्तर तक ले जा सकते हैं।
आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम
डॉ. जितेंद्र पासवान ने कहा कि अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति के उद्यमियों, विशेषकर महिला उद्यमियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार से जोड़ना आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ बाजार, गुणवत्ता, निर्यात प्रक्रिया और आधुनिक व्यापार व्यवस्था की जानकारी भी उद्यमियों तक पहुंचनी चाहिए।
उन्होंने उद्यमियों से सरकारी योजनाओं की पात्रता और वर्तमान नियमों की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाने तथा अपने उत्पादों को देश के साथ-साथ विदेशी बाजारों तक पहुंचाने का आह्वान किया।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने इच्छुक उद्यमियों से योजनाओं की विस्तृत जानकारी एवं मार्गदर्शन के लिए एसोसिएशन से संपर्क करने की अपील की है।


