
नई दिल्ली। छोटे और सूक्ष्म उद्यमियों के सामने अक्सर उत्पादन से अधिक बड़ी चुनौती अपने उत्पादों को बाजार तक पहुंचाने और नए खरीदारों से जोड़ने की होती है। ऐसे में राष्ट्रीय लघु उद्योग निगम (NSIC) की विपणन सहायता तथा Procurement & Marketing Support से जुड़ी सुविधाएं सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए महत्वपूर्ण अवसर उपलब्ध कराती हैं। NSIC, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय के अधीन कार्यरत सरकारी उपक्रम है और विपणन, प्रौद्योगिकी तथा वित्तीय सहायता सहित विभिन्न सेवाएं उपलब्ध कराता है।
एससी-एसटी उद्यमियों के लिए प्रदर्शनी में विशेष सहायता
NSIC की योजना के अंतर्गत घरेलू प्रदर्शनियों और व्यापार मेलों में MSME इकाइयों को स्टॉल/निर्मित स्थान उपलब्ध कराने के लिए रियायती सहायता का प्रावधान है। उपलब्ध योजना दस्तावेज के अनुसार NE Region, महिला तथा एससी-एसटी श्रेणी के उद्यमियों के लिए माइक्रो उद्यमों को स्थान शुल्क पर 95 प्रतिशत, स्मॉल उद्यमों को 85 प्रतिशत तथा मीडियम उद्यमों को 50 प्रतिशत तक सहायता का प्रावधान रहा है। सामान्य श्रेणी के लिए क्रमशः 75, 60 और 25 प्रतिशत की दरें दी गई हैं।
इसका अर्थ यह है कि यदि किसी पात्र माइक्रो उद्यमी के लिए किसी प्रदर्शनी में स्टॉल शुल्क ₹1 लाख निर्धारित है और संबंधित आयोजन में 95 प्रतिशत सहायता लागू होती है, तो पात्रता एवं स्वीकृत नियमों के अनुसार उद्यमी का हिस्सा लगभग ₹5,000 हो सकता है। वास्तविक देय राशि आयोजन, पात्रता, स्वीकृत सहायता और लागू दिशा-निर्देशों पर निर्भर करेगी।
देश-विदेश की प्रदर्शनियों में उत्पादों को प्रदर्शित करने का अवसर
NSIC देश में आयोजित विभिन्न प्रदर्शनियों और व्यापार मेलों में MSMEs की भागीदारी को प्रोत्साहित करता है। इसके अतिरिक्त अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियों और ट्रेड फेयर में भागीदारी के लिए भी सहायता के प्रावधान हैं। NSIC की आधिकारिक वेबसाइट पर International Exhibition, E-Marketing Services तथा Consortia & Tender Marketing जैसी सेवाओं के लिए आवेदन/जानकारी उपलब्ध है।
NSIC द्वारा आयोजित Techmart जैसे आयोजनों का उद्देश्य भारतीय MSMEs के उत्पादों, तकनीकों और सेवाओं को व्यापक बाजार के सामने प्रस्तुत करना है। विशेष श्रेणी के उद्यमियों के लिए इसमें भी रियायती सहायता के प्रावधान योजना दस्तावेजों में दिए गए हैं।
Buyer-Seller Meet से नए बाजारों तक पहुंच
NSIC की विपणन गतिविधियों में प्रदर्शनियों के साथ-साथ खरीदारों और MSMEs के बीच संपर्क स्थापित करने तथा सरकारी विभागों और सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों के साथ व्यापारिक अवसर विकसित करने की व्यवस्था भी शामिल है। इसका उद्देश्य MSMEs को नए बाजार, बड़े खरीदारों और संभावित व्यावसायिक साझेदारों तक पहुंच बनाने में सहायता देना है।
ONDC के माध्यम से डिजिटल बाजार का विस्तार
MSME क्षेत्र में डिजिटल बाजार तक पहुंच बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने MSME TEAM Initiative शुरू किया है। 27 जून 2024 को शुरू की गई इस पहल का लक्ष्य लगभग 5 लाख Micro and Small Enterprises को ONDC नेटवर्क से जोड़ना है, जिनमें 2.5 लाख महिला-स्वामित्व वाले उद्यमों का लक्ष्य रखा गया है। इसके अंतर्गत कैटलॉग तैयार करने, अकाउंट मैनेजमेंट, लॉजिस्टिक्स एवं पैकेजिंग जैसी गतिविधियों में सहायता का प्रावधान है। NSIC को इस पहल की Implementing Agency बनाया गया है।
NSIC बना Schedule-A CPSE
फरवरी 2026 में NSIC को Schedule-A Central Public Sector Enterprise (CPSE) के रूप में अपग्रेड किया गया। Department of Public Enterprises के फरवरी 2026 के आधिकारिक सारांश में इसकी पुष्टि की गई है।
उद्यमियों के लिए क्या जरूरी है?
MSME योजनाओं का लाभ लेने के लिए संबंधित उद्यम की पात्रता और उस समय लागू योजना के दिशा-निर्देशों की जांच आवश्यक है। उद्यमियों को Udyam Registration सहित संबंधित दस्तावेज तैयार रखने चाहिए और आवेदन से पहले NSIC की वर्तमान योजना-शर्तों एवं आयोजन-विशेष दिशा-निर्देशों की पुष्टि करनी चाहिए।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े एससी-एसटी उद्यमियों के लिए ऐसी योजनाओं की जानकारी, सामूहिक भागीदारी और बाजार संपर्क विकसित करना उपयोगी हो सकता है। एक ही प्रदर्शनी में अनेक उद्यमी सामूहिक रूप से अपने उत्पादों को प्रस्तुत कर संभावित खरीदारों से संपर्क स्थापित कर सकते हैं।
डॉ. जितेन्द्र पासवान ने कहा कि एससी-एसटी उद्यमियों के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए उत्पादन के साथ-साथ बाजार, ब्रांडिंग, डिजिटल कॉमर्स और खरीदारों तक सीधी पहुंच पर भी ध्यान देना जरूरी है। उनका कहना है कि सरकारी विपणन सहायता योजनाओं की जानकारी को उद्यमियों तक पहुंचाकर उन्हें उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।


