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विपश्यना के महान आचार्य सत्यनारायण गोयनका का आज होगा पुण्यस्मरण

ऑनलाइन कार्यक्रम में विपश्यना साधना, पालि भाषा और त्रिपिटक साहित्य के अध्ययन को आगे बढ़ाने का आह्वान

नजीबाबाद। विपश्यना ध्यान के महान आचार्य एवं प्रचारक सत्यनारायण गोयनका जी के पुण्यस्मरण एवं पुण्यानुमोदन के अवसर पर मंगलवार, 29 सितम्बर को शाम 8 बजे ऑनलाइन कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम का आयोजन भदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि-संवर्धन प्रतिष्ठान द्वारा Zoom Meeting के माध्यम से किया जाएगा।

इस संबंध में बुद्ध संस्कृति विश्वविद्यापीठ के अध्यक्ष गोविंद सिंह बौद्ध ने जानकारी देते हुए बताया कि आचार्य सत्यनारायण गोयनका ने अपने गुरु आचार्य सयाजी ऊ बा खिन से विपश्यना ध्यान की शिक्षा प्राप्त की थी। वर्ष 1969 में भारत आगमन के बाद उन्होंने इस प्राचीन ध्यान-पद्धति के प्रचार-प्रसार का व्यापक कार्य प्रारंभ किया।

गोयनका जी ने विपश्यना को जाति, धर्म, संप्रदाय और देश की सीमाओं से परे एक सार्वभौमिक साधना के रूप में प्रस्तुत किया। उनके मार्गदर्शन में भारत सहित विश्व के अनेक देशों में विपश्यना साधना केंद्र स्थापित हुए। महाराष्ट्र के इगतपुरी स्थित धम्मगिरि को विपश्यना साधना के प्रमुख केंद्रों में माना जाता है।

गोविंद सिंह बौद्ध ने बताया कि गोयनका जी की शिक्षाओं का मूल संदेश अपने भीतर उत्पन्न होने वाले अनुभवों को सजगता और समता के साथ देखना तथा शील, समाधि और प्रज्ञा के माध्यम से जीवन को अधिक शांत एवं शुद्ध बनाना था। उनके धम्म संदेश ने विपश्यना साधना को व्यापक समाज तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

उन्होंने कहा कि पुण्यस्मरण एवं पुण्यानुमोदन के इस अवसर पर आचार्य गोयनका के धम्म संदेश और उनके योगदान को स्मरण करते हुए मैत्री, करुणा और समता के मार्ग पर आगे बढ़ने का संकल्प लिया जाएगा। साथ ही पालि भाषा एवं त्रिपिटक साहित्य के अध्ययन और संरक्षण को जन-जन तक पहुंचाने की आवश्यकता पर भी विचार किया जाएगा।

कार्यक्रम विवरण

दिनांक: 29 सितम्बर 2026
समय: शाम 8:00 बजे
माध्यम: Zoom Meeting
आयोजक: भदन्ताचार्य बुद्धदत्त पालि-संवर्धन प्रतिष्ठान

कार्यक्रम में सहभागिता के लिए Zoom लिंक:
https://zoom.us/j/92967825086?pwd=q7JUrsmur8gvxGcjJuKMBgHLNTbt6r.1

गोविंद सिंह बौद्ध ने पालि भाषा एवं त्रिपिटक साहित्य में रुचि रखने वाले लोगों से कार्यक्रम में सहभागी बनने का आह्वान करते हुए कहा कि पालि के अध्ययन और धम्म साहित्य की समझ को व्यापक जनसमुदाय तक पहुंचाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।

कार्यक्रम के माध्यम से “पालि के इस अभियान को जन-आंदोलन बनाने” का संदेश भी दिया जाएगा।

 

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