
विशेष लेख | डॉ. जितेन्द्र पासवान
धनतेरस आते ही बाजारों में खरीदारी की धूम मच जाती है। कोई सोने-चांदी के आभूषण खरीदता है तो कोई टीवी, फ्रिज, वाहन और घरेलू उपयोग की वस्तुएं। हर व्यक्ति अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार त्योहार मनाता है। लेकिन एक महत्वपूर्ण सवाल है कि हम हमेशा खरीददार ही क्यों बने रहें? विक्रेता और उत्पादक बनने की दिशा में कदम क्यों न बढ़ाएं?
आर्थिक क्रांति का संदेश है कि समाज को केवल उपभोग करने की मानसिकता से बाहर निकलकर उत्पादन और उद्यमिता की ओर बढ़ना होगा।
डॉ. जितेन्द्र पासवान ने ‘धनतेरस’ और ‘धनतरेस’ के अंतर को एक आर्थिक सोच के रूप में प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, एक ओर व्यापारी और उत्पादक बिक्री के माध्यम से अपनी पूंजी बढ़ाते हैं, वहीं दूसरी ओर आम लोग अपनी जमा पूंजी और कभी-कभी कर्ज लेकर सामान खरीदते हैं। खरीदारी गलत नहीं है, लेकिन यदि पूरी कमाई उपभोग में खर्च हो जाए और उत्पादन के लिए कुछ न बचे तो आर्थिक आत्मनिर्भरता का सपना अधूरा रह जाता है।
खरीददार से उत्पादक बनने का संकल्प लें
डॉ. पासवान का कहना है कि इस धनतेरस पर केवल घरेलू सामान खरीदने के बजाय कुटीर, लघु और ग्रामीण उद्योग स्थापित करने के बारे में भी सोचें। अपनी क्षमता के अनुसार मशीन एवं संयंत्र खरीदकर उत्पादन शुरू करें। इससे परिवार की आमदनी बढ़ने के साथ दूसरे लोगों को भी रोजगार मिल सकता है।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़े कुछ युवा उद्यमियों ने बताया कि उन्हें उद्योग के लिए ऋण तो मिला है, लेकिन अभी उत्पादन और बिक्री शुरू नहीं हो पाई है। उद्यमी पाठशाला में उन्हें उत्पादन के साथ विपणन और बिक्री का महत्व भी समझाया गया था। अब वे अपने कारोबार को धरातल पर उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
SIDBI UDAY योजना से मशीनरी खरीदने में सहायता
युवा सूक्ष्म एवं लघु उद्यमियों के लिए SIDBI की UDAY (Udyam Abhi Vriddhi Yojana) योजना भी उपयोगी हो सकती है। इसका उद्देश्य पात्र नए सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों को मशीनरी खरीदने के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध कराना है।
योजना के तहत पात्रता, ऋण राशि, ब्याज दर और भुगतान की शर्तें SIDBI के मूल्यांकन एवं लागू दिशा-निर्देशों के अनुसार निर्धारित होती हैं। इच्छुक उद्यमी उद्यम पंजीकरण, KYC, मशीनरी का कोटेशन, बैंक विवरण और परियोजना रिपोर्ट जैसे दस्तावेज तैयार रखें। विस्तृत जानकारी SIDBI की आधिकारिक वेबसाइट www.sidbi.in अथवा नजदीकी शाखा से प्राप्त की जा सकती है।
आर्थिक क्रांति का आधार बनेगा उत्पादन
डॉ. जितेन्द्र पासवान ने युवाओं, कर्मचारियों, मजदूरों और छोटे उद्यमियों से अपील की है कि वे अपनी आय का कुछ हिस्सा बचत और उत्पादक निवेश के लिए सुरक्षित रखें। केवल ऋण लेना या मशीन खरीदना ही उद्यमिता नहीं है, बल्कि वास्तविक सफलता उत्पादन शुरू करने, बाजार में बिक्री करने और रोजगार पैदा करने में है।
इस धनतेरस एक संकल्प लें—केवल सामान खरीदने वाले नहीं, बल्कि सामान बनाने और बेचने वाले भी बनें। क्योंकि उपभोग से वस्तुएं मिलती हैं, जबकि उत्पादन से पूंजी, रोजगार और आर्थिक समृद्धि आती है।
विशेष जानकारी एवं उद्यमिता मार्गदर्शन के लिए दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़ें।



