बिजनौर, 21 सितंबर। शेरकोट थाना क्षेत्र के वाजिदपुर में रविवार शाम को पुराने और बंद पड़े ईंट-भट्ठे के पास हुए धमाके की चपेट में आकर घास काटने गए दो सगे भाई गंभीर रूप से झुलस गए। दोनों को उपचार के लिए मेरठ रैफर किया गया है।
स्थानीय लोगों के अनुसार धमाके की आवाज सुनकर आसपास के लोग घटना स्थल पर पहंुचे तथा घटना की सूचना पुलिस दी। सूचना मिलते ही पुलिस और दमकल की टीम मौके पर पहुंची। सीओ अंजनी चतुर्वेदी ने भी घटनास्थल का निरीक्षण किया।
पुलिस के अनुसार घायल बच्चों की पहचान रोहित (12) और सागर (16) के रूप में हुई है। दोनों भाई अपनी बकरियों के लिए रविवार की शाम को घास काटने जंगल गए थे। इसी दौरान पुराने बंद ईंट-भट्ठे के पास पड़े पटाखा फैक्ट्री के कचरे में अचानक आग लगी और उसके बाद धमाका हो गया। दोनों बच्चे इसकी चपेट में आकर झुलस गए। घटनास्थल पटाखा फैक्ट्री से करीब 400 मीटर दूर बताया गया है। दूसरी ओर पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पटाखा फैक्ट्री का कचरा वहां कब और किसके द्वारा डाला गया तथा उसमें आग लगने और धमाका होने की वजह क्या थी।
पुलिस ने दोनो घायल बच्चो को उपचार के लिए बिजनौर जिला अस्पताल में भर्ती कराया। जिला अस्पताल के डाक्टरो के अनुसार दोनों बच्चे 60-65 प्रतिशत तक झुलसे हुए है। उनकी हालात गंभीर देखते हुए मेरठ मेडिकल कालेज रैफर कर दिया गया।
घटना की जानकारी मिलने पर जिलाधिकारी जसजीत कौर जिला अस्पताल की इमरजेंसी पहुंचीं और चिकित्सकों से दोनों बच्चों के उपचार की जानकारी ली। जिलाधिकारी ने बताया कि मामले की गंभीरता को देखते हुए संबंधित उपजिलाधिकारी को मौके पर भेजा गया है। पूरे मामले की जांच कराई जा रही है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
औद्यौगिक कचरे से पहले ही हुए हैं गंभीर हादसे
उल्लेखनीय है कि शेरकोट की घटना से पहले बिजनौर जिला मुख्यालय पर गर्म औद्योगिक राख से वर्ष 2025 में एक एवं मई, 2026 में
पांच बच्चे गंभीर रूप से झुलस गये थे। इनमें से उपचार के दौरान दो मासूमो की जान चली गई थी।




