
बिजनौर, 7 जुलाई।
राजस्व न्यायालयों में लंबित वादों के निस्तारण की प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, न्यायसंगत और गुणवत्तापूर्ण बनाने के लिए मंगलवार को मुरादाबाद मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया गया कि अब राजस्व वादों को केवल तकनीकी आधार पर खारिज करने की प्रवृत्ति पर रोक लगाई जाएगी। प्रत्येक मामले में संबंधित पक्षों को सुनवाई का पूरा अवसर देते हुए विधिक प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर ही निर्णय पारित किया जाए।

मुरादाबाद आयुक्त सभागार में आयोजित कार्यशाला में बिजनौर और रामपुर के अपर जिलाधिकारी, उप जिलाधिकारी, तहसीलदार, नायब तहसीलदार, मंडलीय एवं जिला शासकीय अधिवक्ता मौजूद रहे, जबकि दोनों जनपदों के राजस्व कर्मचारी और नामित अधिवक्ता ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। मंडलायुक्त ने अधीनस्थ राजस्व न्यायालयों में सामने आ रही प्रक्रियागत कमियों पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि न्याय केवल होना ही नहीं चाहिए, बल्कि होता हुआ दिखाई भी देना चाहिए।
उन्होंने निर्देश दिए कि मियाद अधिनियम की धारा-5 से जुड़े मामलों में भी केवल तकनीकी आधार पर वाद निरस्त करने के बजाय प्रभावित पक्ष को सुनवाई का पूरा अवसर दिया जाए और गुण-दोष के आधार पर निष्पक्ष निर्णय सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने सभी पीठासीन अधिकारियों को विचाराधीन पत्रावलियों का प्रतिदिन परीक्षण करने, अभिलेखों का सुव्यवस्थित रखरखाव सुनिश्चित करने तथा यथासंभव स्वयं आदेश लिखने के निर्देश भी दिए, ताकि न्यायिक प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बनी रहे।

कार्यशाला में विशेष अतिथि जे.पी. गुप्ता (पीसीएस) और मुख्य पर्यवेक्षक यशपाल सिंह ने नॉन-ज़ेडए, नजूल भूमि तथा शत्रु संपत्ति से जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तार से जानकारी दी। अपर आयुक्त प्रथम ने निष्कांत संपत्ति, सीलिंग अधिनियम और वक्फ अधिनियम के महत्वपूर्ण पहलुओं पर अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया।
मंडलीय शासकीय अधिवक्ता दिनेश चौहान ने राजस्व न्यायालयों में वादों के निस्तारण के दौरान सामने आने वाली अनियमितताओं पर प्रकाश डाला। कार्यशाला का समापन प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें अधिकारियों की शंकाओं का समाधान किया गया।
