
बिजनौर। रबी फसलों में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम करने और किसानों को नैनो उर्वरकों तथा जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से कृषि विज्ञान केंद्र, नगीना में इफको की ओर से जिला सहकारी सम्मेलन एवं नैनो उर्वरक प्रचार कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में कृषि विभाग के अधिकारियों एवं कर्मचारियों को नैनो डीएपी से बीज उपचार सहित उर्वरकों के संतुलित उपयोग की तकनीकी जानकारी दी गई।
कार्यक्रम में बताया गया कि गेहूं की बुवाई से पहले बीज उपचार के लिए 100 किलोग्राम बीज पर एक बोतल नैनो डीएपी और 500 मिलीलीटर जैव उर्वरक के उपयोग की सलाह दी गई। साथ ही दानेदार डीएपी के उपयोग को कम करने के लिए एक बोरी डीएपी को दो एकड़ क्षेत्र में प्रयोग करने की जानकारी दी गई।
अधिकारियों एवं कर्मचारियों को रासायनिक डीएपी और एनपीके की खपत में करीब 25 प्रतिशत तक कमी लाने तथा आवश्यकता के अनुसार नैनो उर्वरक, जैव उर्वरक, जल-विलेय उर्वरक और इफको की प्राकृतिक पोटाश जैसे विकल्पों के उपयोग की तकनीक समझाई गई।
कम लागत में बेहतर उत्पादन पर जोर
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उप कृषि निदेशक डॉ. घनश्याम वर्मा ने कृषि विभाग की विभिन्न योजनाओं की जानकारी देते हुए किसानों तक नैनो उर्वरकों की उपलब्धता और उपयोग की तकनीक पहुंचाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आगामी गेहूं और गन्ने की फसल में नैनो डीएपी से बीज उपचार के बाद बुवाई करने तथा नैनो उर्वरकों एवं जैविक उत्पादों के संतुलित प्रयोग से कृषि लागत कम करने की दिशा में काम किया जा सकता है।
उन्होंने विभागीय योजनाओं के माध्यम से किसानों को नैनो उर्वरक उपलब्ध कराने और आधुनिक उर्वरक तकनीकों के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता बताई।
कृषि विज्ञान केंद्र की वैज्ञानिक डॉ. शिवांगी ने कृषि विभाग के कर्मचारियों से किसानों को रासायनिक उर्वरकों के अत्यधिक एवं असंतुलित प्रयोग से होने वाले संभावित नुकसान के बारे में जागरूक करने का आह्वान किया। उन्होंने नैनो उर्वरक और जल-विलेय उर्वरकों को विकल्प के रूप में अपनाने की जानकारी किसानों तक पहुंचाने पर जोर दिया।
नैनो उर्वरकों के उपयोग पर वैज्ञानिक जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. केके सिंह ने नैनो उर्वरकों के उपयोग और फसल उत्पादन पर उनके प्रभाव के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि कृषि विज्ञान केंद्र के फार्म पर पिछले चार वर्षों से नैनो उर्वरकों का प्रयोग किया जा रहा है। उनके अनुसार इस दौरान उत्पादन में वृद्धि के साथ फसलों में रोगों के प्रकोप में कमी देखी गई है।
जल्द उपलब्ध होगा नैनो एनपीके : इफको
इफको के क्षेत्रीय प्रबंधक जितेंद्र कुमार गंगवार ने बताया कि किसानों की लागत कम करने और गुणवत्तापूर्ण उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए इफको लगातार नई तकनीकों पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि किसानों में नैनो डीएपी की मांग बढ़ रही है और इफको जल्द ही नैनो एनपीके उपलब्ध कराने की दिशा में काम कर रही है।
उन्होंने बताया कि नैनो एनपीके का उद्देश्य खड़ी फसल में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश की संतुलित एवं नियंत्रित आपूर्ति करना है। इसके अलावा इफको जल-विलेय उर्वरकों को माइक्रोनाइज तकनीक से अधिक प्रभावी बनाने पर भी काम कर रही है। कार्यक्रम में टेक्ना-20 सहित जल-विलेय उर्वरकों के प्रयोग से जुड़े अनुभवों की जानकारी भी साझा की गई।
वैकल्पिक उर्वरकों के इस्तेमाल की सलाह
कार्यक्रम में शिवम तिवारी, क्षेत्र अधिकारी, इफको तथा अन्य अधिकारियों ने किसानों को सहकारी समितियों पर उपलब्ध वैकल्पिक उत्पादों के उपयोग की जानकारी दी। इनमें जैव उर्वरक, एनपीके तरल कंसोर्टिया, सागरिका, नैनो डीएपी तथा एनपीके 19-19-19 शामिल हैं।
वक्ताओं ने कहा कि खड़ी फसल में फास्फोरस की आवश्यकता की पूर्ति के लिए नैनो डीएपी तथा संतुलित पोषण के लिए जल-विलेय उर्वरकों का उपयोग किया जा सकता है। रासायनिक पोटाश की कीमत अधिक होने का उल्लेख करते हुए उसके विकल्प के रूप में इफको की प्राकृतिक पोटाश के प्रयोग की जानकारी भी दी गई।
कार्यक्रम का उद्देश्य किसानों तक उर्वरकों के संतुलित और वैज्ञानिक उपयोग की जानकारी पहुंचाकर कृषि लागत को नियंत्रित करने तथा उत्पादन क्षमता में सुधार के लिए आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देना रहा।
कार्यक्रम के अंत में कृषि स्नातक प्रशिक्षु निशांत पटेल ने सभी अतिथियों, अधिकारियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया।

