
राष्ट्रीय पंचायत | आजमगढ़।
दी बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया (भारतीय बौद्ध महासभा), जिला शाखा आजमगढ़, उत्तर प्रदेश पूर्वांचल के तत्वावधान में रविवार, 11 अक्टूबर 2026 को वर्षावास कार्यक्रम का आयोजन ग्राम पंचायत भवन, देवरिया, मेंहनगर, जनपद आजमगढ़ में किया गया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘माता रमाई के व्यक्तित्व के अष्ट पहलू’ रहा। वक्ताओं ने माता रमाई के त्याग, संघर्ष, धैर्य और समर्पण को याद करते हुए उनके जीवन से प्रेरणा लेने का आह्वान किया।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि एवं भारतीय बौद्ध महासभा के उत्तर प्रदेश पूर्वांचल के प्रदेश अध्यक्ष निर्भय कुमार जैसल बौद्ध ने कहा कि माता रमाई ने अपने जीवन में अनेक कठिनाइयों और दुखों का सामना किया, लेकिन बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर को उनके महान उद्देश्य की दिशा में आगे बढ़ने में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। उनका जीवन त्याग, धैर्य और समर्पण की ऐसी मिसाल है, जिससे समाज को प्रेरणा मिलती है। उन्होंने कहा कि माता रमाई के योगदान को समझना और उनके आदर्शों को अपनाना सामाजिक जागरूकता के लिए आवश्यक है।

विशिष्ट अतिथि डॉ. रामनाथ भारती ने माता रमाई के व्यक्तित्व के अष्ट पहलुओं पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने उनके जीवन-संघर्ष, पारिवारिक जिम्मेदारियों, त्याग और बाबा साहब के सामाजिक परिवर्तन के मिशन में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि माता रमाई का जीवन समाज को धैर्य, कर्तव्यनिष्ठा और विपरीत परिस्थितियों में भी अपने दायित्वों का निर्वहन करने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम में प्रदेश कोषाध्यक्ष राम कुमार व्यास, प्रदेश संगठक डॉ. रतन लाल, डॉ. जी.एन. बौद्ध और राजेंद्र प्रसाद यादव ने भी अपने विचार व्यक्त किए। वक्ताओं ने माता रमाई के योगदान को सामाजिक चेतना, महिला सम्मान और समतामूलक समाज के निर्माण की दृष्टि से महत्वपूर्ण बताया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता आजमगढ़ जिला अध्यक्ष संघपाल बौद्ध ने की। उन्होंने आयोजन के उद्देश्य और माता रमाई के जीवन से मिलने वाली प्रेरणा पर विचार रखे। कार्यक्रम के अंत में जिला उपाध्यक्ष मुसाफिर लाल बौद्ध ने सभी अतिथियों, वक्ताओं और उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर जिला उपाध्यक्ष राम दुलार बौद्ध, कल्पनाथ बौद्ध, शंभू गौतम, दल श्रृंगार, अच्छेलाल, रामआसरे बौद्ध, प्रेमचंद मास्टर, वीरेंद्र भारती, छोटेलाल मास्टर और सतीश चंद सहित अन्य लोग उपस्थित रहे।
वर्षावास कार्यक्रम के माध्यम से माता रमाई के त्यागपूर्ण जीवन और उनके योगदान को स्मरण करते हुए समाज में शिक्षा, समानता, सामाजिक जागरूकता तथा मानवीय मूल्यों को मजबूत करने का संदेश दिया गया।




