निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश उत्पादों के उपयोग पर जोर
डीएम जसजीत कौर ने की समीक्षा बैठक, सरकारी व निजी परियोजनाओं में फ्लाई ऐश आधारित सामग्री का शत-प्रतिशत उपयोग सुनिश्चित करने के निर्देश
बिजनौर। जनपद में पर्यावरण अनुकूल निर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी जसजीत कौर की अध्यक्षता में मंगलवार को कलेक्ट्रेट सभागार में समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, भारत सरकार की 1 जनवरी 2024 की अधिसूचना के अनुपालन में निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों के उपयोग की समीक्षा की गई।
जिलाधिकारी ने सभी कार्यदायी संस्थाओं, नगर निकायों, लोक निर्माण विभाग, जिला पंचायत राज विभाग, उत्तर प्रदेश राजकीय निर्माण निगम, नेडा तथा उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड सहित संबंधित विभागों को निर्देश दिए कि शासन और भारत सरकार के प्रावधानों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करते हुए सभी पात्र निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों का प्राथमिकता के आधार पर उपयोग कराया जाए।
बैठक में बताया गया कि अधिसूचना के अनुसार कोयला अथवा लिग्नाइट आधारित तापीय विद्युत संयंत्रों के 300 किलोमीटर के दायरे में आने वाली सभी सरकारी, अर्द्धसरकारी एवं निजी निर्माण परियोजनाओं में फ्लाई ऐश आधारित उत्पादों का उपयोग अनिवार्य है। इनमें फ्लाई ऐश ईंट, टाइल्स, ब्लॉक, सिंटर्ड ऐश समुच्चय तथा अन्य स्वीकृत उत्पाद शामिल हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों और स्थानीय निकायों को अपने भवन उपविधियों एवं अन्य नियमों में आवश्यक प्रावधान सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। साथ ही जनपद की फ्लाई ऐश उत्पाद निर्माण इकाइयों—मैसर्स मनन इंटरप्राइजेज (भागूवाला, नजीबाबाद), मैसर्स गंगा कंक्रीट (दारानगर गंज, बिजनौर) तथा मैसर्स ग्रीन ब्रिक्स (नंगल जट, बिजनौर)—से समन्वय स्थापित कर निर्माण कार्यों में फ्लाई ऐश से निर्मित ईंटों एवं अन्य उत्पादों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया। बैठक में संबंधित विभागों के अधिकारी एवं विभिन्न कार्यदायी संस्थाओं के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।