
हैदराबाद। तेलंगाना के आदिलाबाद स्थित राजीव गांधी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (आरआईएमएस) अस्पताल की विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई (एसएनसीयू) में 21 सितंबर की रात लगी आग ने कई परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया। हादसे में पांच नवजात शिशुओं की मौत हो गई। इनमें पांच दिन की वह बच्ची भी शामिल थी, जिसके पिता पीर खान ने आग और धुएं के बीच अपनी जान जोखिम में डालकर 12 अन्य नवजातों को बाहर निकालने में मदद की।
मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, हादसा रात करीब 11ः40 बजे हुआ। उस समय एसएनसीयू में कुल 27 नवजात भर्ती थे। अधिकारियों के अनुसार, घटना के दौरान तीन नवजातों की मौत हुई, जबकि दो अन्य ने 23 सितंबर को इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। बचाए गए बच्चों को आदिलाबाद के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।
‘पहले 12 बच्चों को बाहर निकाला’
पीर खान इच्चोदा में दुकान चलाते हैं। हाल ही में उनकी बेटी का जन्म हुआ था। उन्होंने बताया कि आग लगने के बाद उनका ध्यान सबसे पहले एसएनसीयू में मौजूद अन्य बच्चों को बाहर निकालने पर गया। उन्होंने कहा कि उन्होंने 12 बच्चों को बाहर निकालने में मदद की, लेकिन अपनी पांच दिन की बेटी को नहीं बचा सके। बच्ची की मौत दम घुटने के कारण हुई।
हादसे के बाद एसएनसीयू में धुआं इतना भर गया था कि अंदर कुछ दिखाई देना मुश्किल हो गया। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, आग लगने के बाद धमाके भी सुनाई दिए। कुछ लोगों ने धुआं बाहर निकालने के लिए खिड़कियों के शीशे तोड़े और बच्चों को बाहर निकालने में मदद की।

एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट का प्रारंभिक अनुमान
तेलंगाना के चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री दामोदर राजनरसिम्हा के अनुसार, प्रारंभिक जांच में एसएनसीयू की एसी यूनिट में शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण बताया गया है। मंत्री के मुताबिक आग के साथ जहरीला धुआं और गैस फैलने से स्थिति गंभीर हो गई।
सरकार ने हादसे की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित की है। मंत्री ने कहा है कि समिति की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
अस्पताल प्रबंधन ने लापरवाही के आरोप नकारे
हादसे के बाद कुछ परिजनों ने अस्पताल कर्मचारियों की भूमिका और व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। वहीं, आरआईएमएस के निदेशक डॉ. जयसिंह ने लापरवाही के आरोपों से इनकार किया है। उनका कहना है कि घटना के कुछ ही मिनटों में डॉक्टर, विभागाध्यक्ष, जूनियर डॉक्टर और अन्य कर्मचारी मौके पर पहुंच गए थे और करीब दस मिनट के भीतर बच्चों को एसएनसीयू से बाहर निकाल लिया गया।
अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, बच्चों को एंबुलेंस के जरिए दूसरे अस्पतालों में भेजकर उपचार उपलब्ध कराया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों ने बताई भयावह स्थिति
हादसे के समय अस्पताल में मौजूद लोगों के मुताबिक आग और धुएं के कारण एसएनसीयू के भीतर पहुंचना बेहद मुश्किल था। महाराष्ट्र के किनवट निवासी पेंडुर विक्रम ने बताया कि वह अपने छोटे भाई की बच्ची से मिलने अस्पताल आए थे। आग लगने के बाद उन्होंने फायर एक्सटिंग्विशर की मदद से शीशा तोड़ा और बच्चों को बाहर निकालने में सहयोग किया।
एक अन्य परिजन कवेती निर्मला ने बताया कि उन्होंने अपनी पोती को बचाने के लिए धुएं और आग के बीच एसएनसीयू में प्रवेश किया। उनके अनुसार, बच्ची के शरीर पर जलने के निशान थे, फिर भी उन्होंने उसे पहचानकर बाहर निकाला।
हादसे के बाद एसएनसीयू का बड़ा हिस्सा आग और धुएं से क्षतिग्रस्त हो गया। दीवारों और फर्श पर कालिख के निशान तथा क्षतिग्रस्त चिकित्सा उपकरण घटना की गंभीरता को बयां कर रहे थे।
आदिवासी बहुल क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण अस्पताल
आरआईएमएस अस्पताल की स्थापना वर्ष 2008 में आदिलाबाद और आसपास के आदिवासी क्षेत्रों के लोगों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से की गई थी। अस्पताल में आसपास के दूरदराज इलाकों से बड़ी संख्या में मरीज पहुंचते हैं।
अस्पताल प्रशासन के अनुसार, नवजात शिशुओं की मृत्यु दर कम करने के उद्देश्य से विशेष नवजात शिशु देखभाल इकाई संचालित की जा रही थी। हादसे के बाद अब जांच समिति की रिपोर्ट का इंतजार है, जिससे आग के वास्तविक कारण और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।

