– न्यूज डेस्क, राष्ट्रीय पंचायत
बिजनौर। उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (यूपी बोर्ड) ने प्रदेश भर में बड़ी कार्रवाई करते हुए 70 जिलों के 465 विद्यालयों की मान्यता समाप्त कर दी है। निर्धारित मानकों की अनदेखी और अन्य कमियों के चलते की गई इस कार्रवाई की जद में बिजनौर जिले के तीन विद्यालय भी आ गए हैं। बोर्ड की इस सख्त कार्रवाई के बाद जिले के निजी विद्यालय संचालकों में हड़कंप मचा हुआ है।
यूपी बोर्ड द्वारा जारी सूची के अनुसार ’’केपीएम एकेडमी गर्ल्स इंटर कॉलेज, नजीबाबाद’’, ’’एसपीएमएस पब्लिक इंटर कॉलेज, नगीना’’ तथा ’’सुमित्रा देवी एमजीआईसी, धमौला’’ की मान्यता निरस्त कर दी गई है। बताया जा रहा है कि इन विद्यालयों में निर्धारित मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था, जिसके चलते परिषद ने यह कार्रवाई की है। शनिवार को जारी आदेश के बाद प्रदेश भर में शिक्षा जगत में हलचल मच गई। माना जा रहा है कि वर्षों से नियमों की अनदेखी कर संचालित हो रहे विद्यालयों के खिलाफ यह अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाइयों में से एक है। बिजनौर के शिक्षा जगत में भी इस कार्रवाई की चर्चा तेज हो गई है।
सूत्रों के अनुसार, मान्यता समाप्त होने के बाद इन विद्यालयों में अध्ययनरत विद्यार्थियों के भविष्य और उनके आगामी शैक्षिक सत्र को लेकर अभिभावकों की चिंता बढ़ गई है। हालांकि, मान्यता समाप्त होने का मतलब यह नहीं है कि वहां पढ़ रहे विद्यार्थियों की पढ़ाई तुरंत रुक जाएगी या उनका शैक्षणिक भविष्य खत्म हो जाएगा। आमतौर पर ऐसी स्थिति में उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद और जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) की ओर से छात्रों के हितों की रक्षा के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है। लेकिन, समाचार लिखे जाने तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश जारी नहीं किए गए थे।”
वहीं, जिले के अन्य विद्यालय संचालकों ने भी अपने अभिलेखों और व्यवस्थाओं को दुरुस्त करना शुरू कर दिया है। प्रदेश स्तर पर हुई इस कार्रवाई को शिक्षा व्यवस्था में सुधार और फर्जी या मानकविहीन विद्यालयों पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
विद्यार्थियों पर क्या असर पड़ेगा?
यदि विद्यालय की मान्यता पूरी तरह समाप्त हो गई है, तो नए प्रवेश और बोर्ड परीक्षाओं के लिए पंजीकरण पर रोक लग सकती है। पहले से अध्ययनरत छात्रों को नजदीकी मान्यता प्राप्त विद्यालयों में स्थानांतरित (समायोजित) किया जा सकता है।
बोर्ड परीक्षार्थियों के लिए वैकल्पिक परीक्षा केंद्र या संबद्ध विद्यालय निर्धारित किए जा सकते हैं। छात्रों के पंजीकरण, अंकपत्र और शैक्षणिक रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी शिक्षा विभाग की होती है। हालांकि, बिजनौर के इन तीन विद्यालयों के संबंध में अभी तक जिला विद्यालय निरीक्षक या माध्यमिक शिक्षा परिषद की ओर से छात्रों के समायोजन को लेकर कोई सार्वजनिक आदेश सामने नहीं आया है। ऐसे में अभिभावकों और विद्यार्थियों के बीच स्वाभाविक रूप से चिंता का माहौल है।
अधिकारी कहिन
जिला विद्यालय निरीक्षक बिजनौर ……….. ने स्पष्ट किया कि नियमों का पालन न करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा व्यवस्था में गुणवत्ता और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए परिषद प्रतिबद्ध है। और, मानकों से किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जाएगा।