
– राष्ट्रीय पंचायत ब्यूरो
बिजनौर।
सदर तहसील के परगना बिजनौर स्थित मौजा मधुसूदनपुर जागीर में मालन नदी की सरकारी जमीन से करीब 35 पेड़ों का कटान होने का मामला सामने आया है। हैरानी की बात यह है कि जिस जमीन को 16 अप्रैल 2026 को राजस्व विभाग की टीम ने पुलिस बल की मौजूदगी में कब्जामुक्त कराया था, उसी जमीन से अब करीब 34 से 35 पेड़ गायब हो गए हैं। ग्रामीणों के मुताबिक इन पेड़ों की कीमत करीब 90 हजार रूपए थी।
मधुसूदनपुर जागन में मालन नदी के गाटा संख्या-70 की करीब 35 से 40 बीघा भूमि पर लगभग 200 यूकेलिप्टस और अन्य प्रजातियों के पेड़ खड़े हैं। इससे पहले कुछ लोगों ने इस सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर गन्ने की खेती कर ली थी। शिकायतों के बाद राजस्व विभाग की टीम ने 16 अप्रैल 2026 को कार्रवाई करते हुए ट्रैक्टर चलवाकर फसल नष्ट कर कब्जा हटाया था।
लेकिन, अब ग्रामीणों में चर्चा है कि कब्जा हटने के बाद उन्हीं लोगों ने, जिनके कब्जे हटाए गए थे, चुपचाप पेड़ों को कटवा कर लकड़ी ठेकेदारों को बेच दिया। कुछ ग्रामीण दबी जुबान में हल्का लेखपाल पर आरोपियों से सांठगांठ के आरोप लगा रहे हैं। क्योंकि, बिना स्थानीय राजस्व अमले की जानकारी के सरकारी भूमि से दर्जनों पेड़ों का कट जाना संभव नहीं है। उनका कहना है कि सरकारी जमीन पर अवैध कब्जों को बढ़ावा देने में विभागीय कर्मचारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए।

न नीलामी हुई, न पैसा जमा, आखिर जिम्मेदार कौन?
16 अप्रैल 2026 को कब्जा हटाकर जमीन राजस्व विभाग के कब्जे में आ चुकी थी, तो फिर पेड़ किसने कटवाए ? क्या पेड़ों की नीलामी हुई थी ? क्या कटान से प्राप्त धनराशि सरकारी खजाने में जमा कराई गई ? और अगर नहीं, तो लकड़ी की कीमत के करीब 90 हजार रूपए आखिर किसकी जेब में चले गए ? इन सवालों के जवाब फिलहाल किसी के पास नहीं हैं। अब सवाल यह है कि सरकारी जमीन पर खड़े पेड़ कट गए, लकड़ी बिक गई, लेकिन राजस्व विभाग को भनक तक नहीं लगी, या फिर सब कुछ जानकर भी विभाग खामोश है ? इसका जवाब जांच के बाद ही सामने आ सकेगा।
अधिकारी कहिन…
इस मामले में ’राष्ट्रीय पंचायत’ ने क्षेत्रीय कानूनगो विनीत कुमार से बात की। उन्होंने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि सरकारी जमीन से पेड़ों का कटान हुआ है, तो जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।