

नई दिल्ली। भारत दुनिया का सबसे बड़ा दूध उत्पादक देश है। ऐसे में डेयरी क्षेत्र किसानों, युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों के लिए रोजगार और व्यवसाय का बड़ा अवसर बन सकता है। दूध उत्पादन के साथ यदि पनीर, दही, घी, लस्सी और अन्य मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार किए जाएं तो कारोबार को अधिक मजबूत बनाया जा सकता है।
डेयरी में चार प्रमुख कारोबार
डेयरी क्षेत्र में दूध उत्पादन फार्म, दूध कलेक्शन एवं चिलिंग सेंटर, मिल्क प्रोसेसिंग यूनिट तथा अपना डेयरी ब्रांड शुरू किया जा सकता है।
छोटे स्तर पर कुछ पशुओं से शुरुआत करके धीरे-धीरे कारोबार बढ़ाया जा सकता है। वहीं पर्याप्त पूंजी और बाजार वाले उद्यमी प्रोसेसिंग एवं वैल्यू-एडेड उत्पादों की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
सरकारी योजनाओं से मिल सकती है मदद
डेयरी एवं खाद्य प्रसंस्करण से जुड़े उद्यमियों के लिए केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाएं उपलब्ध हैं। PMFME के तहत पात्र सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों को परियोजना लागत के 35 प्रतिशत तक, अधिकतम ₹10 लाख की क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी का प्रावधान है।
वहीं AHIDF के माध्यम से पात्र उद्यमियों और संस्थाओं को डेयरी प्रोसेसिंग तथा वैल्यू-एडिशन इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के लिए वित्तीय सहायता उपलब्ध है। NPDD के तहत दूध संग्रह, चिलिंग और प्रसंस्करण से जुड़े डेयरी ढांचे को भी सहायता दी जाती है।
ध्यान रखें—सरकारी सहायता परियोजना और पात्रता के अनुसार मिलती है। सब्सिडी या निश्चित मुनाफे की गारंटी नहीं होती।
दूध से आगे बढ़ाएं कारोबार
सिर्फ कच्चा दूध बेचने के बजाय पनीर, घी, दही, मक्खन और अन्य उत्पाद तैयार करके अपना बाजार बनाया जा सकता है। स्थानीय दुकानों, होटल, मिठाई कारोबार, संस्थानों और सीधे उपभोक्ताओं तक उत्पाद पहुंचाने के विकल्प मौजूद हैं।
गोबर से वर्मी कम्पोस्ट, जैविक खाद और बायोगैस तैयार करके डेयरी से अतिरिक्त आय का रास्ता भी बनाया जा सकता है।
10 पशुओं से शुरुआत का उदाहरण
10 दुधारू पशुओं से डेयरी शुरू करने पर वास्तविक लागत पशुओं की नस्ल, दूध उत्पादन, शेड, चारा और क्षेत्र के अनुसार अलग-अलग होगी।
यदि उदाहरण के तौर पर 10 पशु प्रतिदिन औसतन 10 लीटर दूध दें और दूध ₹60 प्रति लीटर बिके, तो लगभग ₹1.80 लाख मासिक सकल बिक्री हो सकती है। इसमें चारा, मजदूरी, बिजली, पशु चिकित्सा, बीमा, परिवहन और ऋण की लागत घटाने के बाद ही वास्तविक लाभ पता चलेगा। इसलिए कारोबार शुरू करने से पहले DPR और बाजार सर्वेक्षण जरूरी है।
युवाओं के लिए बड़ा अवसर
डेयरी को आधुनिक तकनीक, बेहतर पशु प्रबंधन, दूध की गुणवत्ता जांच, डिजिटल मार्केटिंग और वैल्यू-एडेड उत्पादों से जोड़कर एक व्यवस्थित व्यवसाय बनाया जा सकता है।
इच्छुक युवा, किसान और उद्यमी पशुपालन विभाग, डेयरी विभाग, कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), बैंक तथा संबंधित सरकारी पोर्टल से वर्तमान योजनाओं और पात्रता की जानकारी लेकर आगे बढ़ सकते हैं।
डेयरी क्षेत्र में आगे बढ़ें, रोजगार पैदा करें
डेयरी केवल पशुपालन नहीं, बल्कि उत्पादन से लेकर प्रोसेसिंग, ब्रांडिंग और बाजार तक एक पूरी वैल्यू चेन है। सही योजना, गुणवत्ता और बाजार की समझ के साथ यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का प्रभावी माध्यम बन सकती है।
विशेष जानकारी एवं मार्गदर्शन के लिए दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन से जुड़ें।
– डॉ. जितेन्द्र पासवान – SC-ST की आर्थिक क्रांति

