
पटना, 11 सितंबर। दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (DIA) ने ब्रिक्स- 2026 के भारत की अध्यक्षता के दौरान एससी-एसटी उद्यमियों की भागीदारी और समावेशी औद्योगिक विकास का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाने की पहल की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. जितेन्द्र पासवान ने विदेश मंत्रालय के ब्रिक्स- 2026 सचिवालय को पत्र भेजकर People-to-People एवं Economic Partnership Track में DIA को शामिल किए जाने का अनुरोध किया है।
एसोसिएशन ने अपने प्रस्ताव में कहा है कि वह वर्ष 2016 से एसी-एसटी समाज को उद्योग, व्यापार एवं उद्यमिता से जोड़ने के लिए कार्य कर रही है। DIA के अनुसार, राज्य उद्योग निदेशालयों और राज्य स्तरीय बैंकर्स समितियों (SLBC) से प्राप्त सूचनाओं के आधार पर किए गए उसके अध्ययन में निजी औद्योगिक क्षेत्र में स्वामित्व और रोजगार के स्तर पर असमानता सामने आई है।
एसोसिएशन द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, करीब 98 प्रतिशत फैक्ट्री मालिक वैश्य, सवर्ण और अल्पसंख्यक समुदायों से संबंधित बताए गए हैं, जबकि करीब 99 प्रतिशत क्लास-1 स्तर के अधिकारी भी इन्हीं समूहों से बताए गए हैं। इसके विपरीत करीब 87 प्रतिशत चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं मजदूर एससी-एसटी समुदायों से संबंधित बताए गए हैं। DIA का कहना है कि इन आंकड़ों से उद्योगों में स्वामित्व और उच्चस्तरीय रोजगार में एससी-एसटी की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता स्पष्ट होती है।
ब्रिक्स के लिए चार प्रमुख प्रस्ताव
DIA ने ब्रिक्स- 2026 के लिए चार प्रमुख प्रस्ताव रखे हैं। इनमें 11 BRICS देशों के बीच SC-ST Startup Exchange Programme, भारत में BRICS Dalit Business Summit 2026 आयोजित करना, ब्रिक्स व्यापार में एससी-एसटी MSMEs से 20 प्रतिशत खरीद के लिए Inclusive Supply Chain Commitment को प्रोत्साहित करना तथा वंचित समुदायों के उद्यमियों के लिए BRICS Innovation Fund स्थापित करने का प्रस्ताव शामिल है।
एसोसिएशन का मानना है कि इन पहलों से वंचित समुदायों के उद्यमियों के बीच अनुभव और तकनीक का आदान-प्रदान बढ़ेगा तथा उन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार और आपूर्ति श्रृंखला से जोड़ने में मदद मिलेगी।
डॉ. जितेन्द्र पासवान ने विदेश मंत्रालय से DIA को प्रस्ताव प्रस्तुत करने का अवसर देने का अनुरोध करते हुए कहा कि समावेशी उद्यमिता को अंतरराष्ट्रीय सहयोग से जोड़ना भारत के मानव-केंद्रित विकास दृष्टिकोण को मजबूत कर सकता है।
एसोसिएशन ने ब्रिक्स- 2026 के भारत के नेतृत्व में एससी-एसटी उद्यमिता, MSME विकास और समावेशी आपूर्ति श्रृंखला जैसे विषयों पर संवाद शुरू करने की आवश्यकता पर जोर दिया है।




