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सुपरकंप्यूटर से खुलेगी आर्थिक क्रांति की राह

NSM से युवाओं को अत्याधुनिक तकनीक का अवसर, SC-ST प्रतिभाओं को मुख्यधारा से जोड़ने पर जोर

नई दिल्ली। भारत तेजी से तकनीकी बदलाव के दौर से गुजर रहा है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, सुपरकंप्यूटिंग, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, क्वांटम कंप्यूटिंग और अंतरिक्ष तकनीक जैसे क्षेत्र युवाओं के लिए रोजगार, शोध और उद्यमिता के नए अवसर पैदा कर रहे हैं। इसी क्रम में भारत सरकार का नेशनल सुपरकंप्यूटिंग मिशन (NSM) देश में उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग क्षमता विकसित करने और शोध एवं नवाचार को गति देने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है।

NSM के तहत विकसित PARAM श्रृंखला के सुपरकंप्यूटरों का उपयोग वैज्ञानिक अनुसंधान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, मौसम एवं जलवायु अध्ययन, दवा अनुसंधान, इंजीनियरिंग सिमुलेशन और बड़े डेटा के विश्लेषण जैसे कार्यों में किया जा रहा है। देश के विभिन्न प्रमुख शैक्षणिक एवं अनुसंधान संस्थानों में सुपरकंप्यूटिंग सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं।

महंगे कंप्यूटिंग संसाधनों का विकल्प

सुपरकंप्यूटर आधारित अनुसंधान के लिए प्रत्येक संस्थान या स्टार्टअप को स्वयं अत्याधुनिक कंप्यूटिंग मशीन खरीदने की जरूरत नहीं है। NSM के तहत निर्धारित प्रक्रिया और नीतियों के अनुसार पात्र संस्थान, शोधकर्ता और अन्य उपयोगकर्ता उपलब्ध HPC संसाधनों का उपयोग कर सकते हैं।

IISc बेंगलुरु में स्थापित PARAM Pravega सहित PARAM श्रृंखला के विभिन्न सुपरकंप्यूटर देश के वैज्ञानिक एवं तकनीकी अनुसंधान को गति दे रहे हैं। इन संसाधनों का इस्तेमाल विभिन्न क्षेत्रों में जटिल गणनाओं और बड़े स्तर के डेटा विश्लेषण के लिए किया जा रहा है।

विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए अवसर

NSM से विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों, वैज्ञानिकों, शिक्षाविदों, HPC उपयोगकर्ताओं, डेवलपर्स और तकनीकी स्टार्टअप को लाभ मिल सकता है। B.Tech, M.Tech और PhD स्तर के विद्यार्थियों के लिए भी संस्थागत शोध परियोजनाओं के माध्यम से इन संसाधनों तक पहुंच का रास्ता खुलता है।

NSM की प्रक्रिया के तहत उपयोगकर्ताओं को संबंधित पोर्टल पर पंजीकरण, ई-मेल सत्यापन और आवश्यक दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया पूरी करनी होती है। स्वीकृति के बाद संबंधित HPC प्रणाली के उपयोग के लिए क्रेडेंशियल उपलब्ध कराए जाते हैं।

कंप्यूटिंग संसाधनों के उपयोग का शुल्क उपयोगकर्ता की श्रेणी और उपलब्ध संसाधन के अनुसार निर्धारित होता है। शैक्षणिक, शोध, स्टार्टअप, MSME और व्यावसायिक उपयोगकर्ताओं के लिए अलग-अलग प्रावधान हो सकते हैं।

SC-ST युवाओं को तकनीकी क्रांति से जोड़ने की जरूरत

डॉ. जितेन्द्र पासवान ने कहा कि देश की तकनीकी प्रगति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुंचना चाहिए। SC-ST समाज के युवाओं को आधुनिक तकनीक, उच्च शिक्षा, शोध, स्टार्टअप और उद्यमिता से जोड़कर आर्थिक सशक्तिकरण की नई राह तैयार की जा सकती है।

उन्होंने कहा कि आज SC-ST युवाओं को केवल नौकरी तलाशने तक सीमित रखने की जरूरत नहीं है। उन्हें AI, ड्रोन, रोबोटिक्स, सॉफ्टवेयर, सेमीकंडक्टर, हेल्थटेक और अन्य उभरते क्षेत्रों में उद्यमी और रोजगारदाता बनने के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि सामाजिक न्याय के साथ अब तकनीकी न्याय पर भी ध्यान देना होगा। तकनीक और ज्ञान तक समान अवसर मिलने से वंचित एवं ग्रामीण क्षेत्रों की प्रतिभाएं भी राष्ट्रीय विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

स्टार्टअप और नई तकनीक पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी युवाओं से बदलती तकनीकी परिस्थितियों के अनुरूप लगातार सीखते रहने और नई तकनीकों में अपनी प्रतिभा का उपयोग करने का आह्वान किया है। उन्होंने युवाओं को स्पेस, सेमीकंडक्टर, ड्रोन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डेटा सेंटर, क्वांटम कंप्यूटिंग, ऊर्जा सुरक्षा और अन्य उभरते क्षेत्रों में नई संभावनाएं तलाशने के लिए प्रेरित किया है।

देश में स्टार्टअप, डिजिटल भुगतान और फिनटेक क्षेत्र के विस्तार से युवाओं के लिए उद्यमिता के नए अवसर पैदा हुए हैं। अब आवश्यकता है कि इन अवसरों को छोटे शहरों, ग्रामीण क्षेत्रों और SC-ST सहित सभी सामाजिक वर्गों के युवाओं तक पहुंचाया जाए।

ज्ञान से रोजगार तक बने नई विकास श्रृंखला

डॉ. जितेन्द्र पासवान ने कहा कि भारत की नई आर्थिक शक्ति का आधार शिक्षा, कौशल, तकनीक, नवाचार और उद्यमिता बनेगा। युवाओं को केवल नौकरी खोजने के बजाय नई तकनीक सीखकर समस्याओं के समाधान विकसित करने और रोजगार पैदा करने के लिए आगे आना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि गांव और छोटे शहरों के युवा AI, ड्रोन, डेटा एनालिसिस और अन्य आधुनिक तकनीकों का उपयोग कर स्थानीय समस्याओं के समाधान तैयार करते हैं तो इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी।

उन्होंने कहा कि “युवा सशक्त होंगे तो परिवार सशक्त होगा और परिवार सशक्त होगा तो देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।” भारत की तकनीकी प्रगति में युवाओं की भागीदारी बढ़ाना और SC-ST सहित समाज के सभी वर्गों को आधुनिक तकनीक से जोड़ना ही समावेशी आर्थिक विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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