बिजनौर। गंगा नदी को प्रदूषण मुक्त रखने के लिए जिला प्रशासन ने सख्ती शुरू कर दी है। जिले में कुल 91 नालों में से 71 नाले अब भी अनटैप्ड हैं। ऐसे में गंगा में दूषित पानी गिरने की समस्या को गंभीरता से लेते हुए जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने संबंधित अधिकारियों को तत्काल अस्थाई व्यवस्था करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसी भी स्थिति में नालों का गंदा पानी सीधे गंगा नदी में नहीं गिरना चाहिए। व्यवस्थाओं की प्रगति की समीक्षा 15 दिनों के भीतर दोबारा की जाएगी।
मंगलवार, 28 अक्टूबर को कलेक्ट्रेट सभागार में जिलाधिकारी की अध्यक्षता में जिला गंगा समिति, जिला पर्यावरण समिति एवं मानव वन्य जीव संघर्ष समिति की बैठक हुई। इसमें गंगा संरक्षण, नालों के पानी का शोधन, ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई व्यवस्था, निजी अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के निस्तारण और गुलदार सहित अन्य वन्यजीवों से होने वाले संघर्ष की स्थिति की समीक्षा की गई।
71 नाले अब भी अनटैप्ड, चार एसटीपी का निर्माण जारी
बैठक में बताया गया कि जनपद में कुल 91 नाले हैं, जिनमें से 20 टैप्ड हैं, जबकि 71 नाले अभी अनटैप्ड हैं। नालों के पानी का समुचित शोधन करने के लिए जल निगम (शहरी) की ओर से चार सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) का निर्माण कराया जा रहा है। पांचवें एसटीपी को भी स्वीकृति मिल चुकी है।
डीएम ने जिला पंचायत राज अधिकारी, प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी और जल निगम के अधिशासी अभियंता को निर्देश दिए कि अनटैप्ड नालों के लिए तत्काल अस्थाई व्यवस्था की जाए। साथ ही निर्माणाधीन एसटीपी का काम युद्धस्तर पर पूरा कराया जाए, ताकि नालों के दूषित पानी को शोधित करने की व्यवस्था जल्द प्रभावी हो सके।
गंगा किनारे के गांवों में चलेगा विशेष सफाई अभियान
जिलाधिकारी ने गंगा किनारे स्थित गांवों में विशेष सफाई अभियान चलाने और नियमित रूप से कूड़ा उठान सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ग्राम स्तर पर गठित ग्राम गंगा समितियों को सक्रिय किया जाए, जिससे गंगा संरक्षण से जुड़े कार्यों को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाया जा सके। ग्रामीणों को भी गंगा को स्वच्छ रखने के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया।
बैठक में निजी अस्पतालों से निकलने वाले बायोमेडिकल वेस्ट के सुरक्षित संग्रहण और नियमानुसार निस्तारण की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए गए। डीएम ने कहा कि नियमों का पालन नहीं करने वाले अस्पतालों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
2026 में अब तक 64 गुलदारों का रेस्क्यू
मानव-वन्यजीव संघर्ष की समीक्षा के दौरान जिला वन अधिकारी ने बताया कि वर्ष 2026 में अब तक जनपद में 64 गुलदारों का रेस्क्यू किया जा चुका है। गुलदारों को पकड़ने के लिए जिले में कुल 124 पिंजरे उपलब्ध हैं। इनमें 52 पिंजरे वन विभाग और 72 पिंजरे राजस्व एवं अन्य विभागों के माध्यम से उपलब्ध कराए गए हैं।
अधिकारियों के अनुसार, गुलदार से संबंधित शिकायत मिलने पर स्थिति और आवश्यकता के आधार पर संबंधित स्थान पर पिंजरा लगाया जाता है। वन विभाग ने इस व्यवस्था के सकारात्मक परिणाम सामने आने की जानकारी भी दी।
जिले में 46 गंगा ग्राम, 115 किलोमीटर का क्षेत्र
बैठक में बताया गया कि बिजनौर में चार विकास खंडों के अंतर्गत कुल 46 गंगा ग्राम हैं। इन क्षेत्रों में गंगा नदी की लंबाई लगभग 115 किलोमीटर है। विदुर कुटी, नांगल सोती, दतियाना और बालावाली घाट सहित अन्य क्षेत्र गंगा संरक्षण की दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं। जिले में 16 छोटी-बड़ी सहायक नदियां भी हैं।
जिलाधिकारी ने संबंधित विभागों को गंगा संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और मानव-वन्यजीव संघर्ष की रोकथाम के लिए आपसी समन्वय के साथ प्रभावी कार्रवाई करने के निर्देश दिए। बैठक में मुख्य विकास अधिकारी, जिला वन अधिकारी और संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।




