बिजनौर। सड़क पर बरती गई थोड़ी-सी सावधानी किसी परिवार की खुशियां उजड़ने से बचा सकती है, जबकि चंद सेकेंड की जल्दबाजी जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। सड़क दुर्घटनाएं केवल आंकड़े नहीं, बल्कि हंसते-खेलते परिवारों के लिए गहरे दुख का कारण बनती हैं। इसी गंभीर विषय को लेकर वरिष्ठ पत्रकार आदिल इरफान ने बिजनौरवासियों से यातायात नियमों का पालन करने और सड़क सुरक्षा को जन-आंदोलन बनाने की भावुक अपील की है।
आदिल इरफान ने कहा कि यातायात नियमों का पालन करना केवल कानूनी बाध्यता नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की सामाजिक और नैतिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा, “यातायात नियम चालान से बचने के लिए नहीं, बल्कि आपकी और आपके अपनों की जिंदगी सुरक्षित रखने के लिए बनाए गए हैं। याद रखिए, घर पर कोई आपका इंतजार कर रहा है।”
हेलमेट और सीट बेल्ट से न करें समझौता
उन्होंने दोपहिया वाहन चालकों और पीछे बैठने वाले यात्रियों से हेलमेट पहनने की अपील की। साथ ही कार में चालक सहित सभी यात्रियों को सीट बेल्ट लगाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि घर से थोड़ी दूर जाने के बहाने सुरक्षा नियमों की अनदेखी करना जानलेवा साबित हो सकता है। दुर्घटना कभी दूरी देखकर नहीं आती।
तेज रफ्तार और मोबाइल का इस्तेमाल बन सकता है हादसे की वजह
आदिल इरफान ने वाहन चलाते समय मोबाइल फोन पर बात करने, संदेश पढ़ने और वीडियो या रील्स देखने से बचने की अपील की। उन्होंने कहा कि सड़क पर एक पल का ध्यान भटकना भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकता है। निर्धारित गति सीमा का पालन करना चाहिए और जल्द पहुंचने की अपेक्षा सुरक्षित पहुंचने को प्राथमिकता देनी चाहिए।
उन्होंने नशे की हालत में वाहन चलाने को गैर-जिम्मेदाराना व्यवहार बताते हुए कहा कि इससे चालक के साथ-साथ सड़क पर चल रहे निर्दोष लोगों की जान भी खतरे में पड़ती है।
नाबालिग बच्चों को वाहन देना पड़ सकता है भारी
वरिष्ठ पत्रकार ने अभिभावकों से विशेष अपील की कि वे शौक या लाड़-प्यार में अपने नाबालिग बच्चों को वाहन चलाने की अनुमति न दें। बच्चों को छोटी उम्र से ही यातायात नियमों, ट्रैफिक सिग्नल, जेब्रा क्रॉसिंग और सड़क पर सुरक्षित चलने के तौर-तरीकों के प्रति जागरूक किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा कि पुलिस और प्रशासन की कार्रवाई का उद्देश्य केवल चालान करना नहीं, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं को रोकना और लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। यदि नागरिक स्वयं जिम्मेदारी से नियमों का पालन करें, तो दुर्घटनाओं में कमी लाने में बड़ी मदद मिल सकती है।
दुर्घटनास्थल पर वीडियो नहीं, घायलों की मदद करें
आदिल इरफान ने सड़क दुर्घटना के समय तमाशबीन बनने और मोबाइल से फोटो या वीडियो बनाने की प्रवृत्ति पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि दुर्घटना में घायल व्यक्ति के लिए शुरुआती समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। ऐसे में वीडियो बनाने के बजाय तुरंत सहायता उपलब्ध कराना अधिक जरूरी है।
उन्होंने लोगों से अपील की कि दुर्घटना की सूचना तत्काल 108 एंबुलेंस सेवा या 112 आपातकालीन सेवा को दें और सुरक्षित तरीके से घायलों को चिकित्सकीय सहायता दिलाने में सहयोग करें।
उन्होंने नेक मददगार (Good Samaritan) व्यवस्था का उल्लेख करते हुए कहा कि सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति की सद्भावपूर्वक मदद करने वालों के अधिकारों और संरक्षण से संबंधित सरकारी प्रावधानों की जानकारी आम जनता तक पहुंचनी चाहिए, ताकि लोग कानूनी परेशानी के डर से पीछे न हटें।
सड़क सुरक्षा के लिए जरूरी है सामूहिक भागीदारी
उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा की जिम्मेदारी केवल पुलिस और प्रशासन की नहीं है, बल्कि इसमें प्रत्येक नागरिक की भागीदारी जरूरी है। स्कूलों में बच्चों को यातायात नियमों की जानकारी दी जानी चाहिए। सड़कों पर खतरनाक मोड़, क्षतिग्रस्त संकेतक, गड्ढे या अन्य जोखिम दिखाई देने पर संबंधित विभाग को सूचना देनी चाहिए।
उन्होंने पैदल यात्रियों, साइकिल सवारों, बुजुर्गों और बच्चों के प्रति विशेष सावधानी बरतने की भी अपील की। सड़क का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति की सुरक्षा सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।
“सुरक्षित चलें, अपनों को सुरक्षित रखें”
अपनी अपील के अंत में आदिल इरफान ने कहा कि सड़क सुरक्षा को केवल किसी विशेष सप्ताह या महीने तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे दैनिक जीवन की आदत बनाना चाहिए।
उन्होंने बिजनौरवासियों से संकल्प लेने का आह्वान किया कि वे स्वयं यातायात नियमों का पालन करेंगे और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करेंगे।
उनका संदेश है— “सावधानी अपनाना समझदारी है, नियमों का पालन जिम्मेदारी है और किसी की जान बचाना ही सच्ची इंसानियत है।”




