बिजनौर। कलक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन पर जिलाधिकारी के प्रतिबंधात्मक आदेश के बावजूद शनिवार को भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के किसानों ने परिसर में प्रवेश कर धरना दिया। जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने मुख्य गेट पर लगी बैरिकेडिंग हटाई और लोहे के गेट पर लगी जंजीर तोड़कर अंदर प्रवेश कर लिया। किसानों ने परिसर में दरी बिछाकर नारेबाजी की और धान खरीद, गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली, चीनी मिलों से निकलने वाली मैली के उचित दाम तथा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) में कथित रूप से काटे गए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा जोड़ने की मांग उठाई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी किसानों को रोकने में सफल नहीं हो सके। बाद में एसडीएम सदर स्मृति मिश्रा धरनास्थल पर पहुंचीं और किसानों से ज्ञापन प्राप्त किया।
गन्ना समिति से पैदल मार्च कर पहुंचे किसान
शनिवार को करीब एक बजे भाकियू टिकैत के कार्यकर्ता गन्ना समिति परिसर में एकत्र हुए। जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान के नेतृत्व में किसान पैदल मार्च करते हुए कलक्ट्रेट पहुंचे। मुख्य गेट पर बैरिकेडिंग और बंद गेट देखकर किसान आक्रोशित हो गए। किसानों ने पहले बैरिकेडिंग हटाई और फिर लोहे के गेट को धक्का दिया। इस दौरान गेट में लगी जंजीर टूट गई और किसान परिसर में दाखिल हो गए।
इसके बाद किसानों ने परिसर में दरी बिछाकर धरना शुरू कर दिया। घटना के दौरान मौके पर मौजूद पुलिसकर्मी और अधिकारी किसानों को रोकने में सफल नहीं हुए। धरने की सूचना के बाद प्रशासनिक स्तर पर हलचल बढ़ गई। एसडीएम सदर स्मृति मिश्रा ने मौके पर पहुंचकर किसानों से ज्ञापन लिया।
एसआईआर में नाम कटने की शिकायतों की जांच की मांग
किसानों ने राष्ट्रपति को संबोधित दूसरे ज्ञापन में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान पात्र मतदाताओं के नाम काटे जाने की शिकायतों का मुद्दा उठाया। ज्ञापन में मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कार्यकाल में मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया की निष्पक्ष जांच कराने, पात्र नागरिकों का मताधिकार सुरक्षित रखने और निर्वाचन प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की गई।
ज्ञापन में कहा गया कि लोकतंत्र की मजबूती प्रत्येक पात्र नागरिक को समान राजनीतिक अधिकार और अपनी सरकार चुनने का अवसर मिलने पर निर्भर करती है। किसानों ने मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया को लेकर सामने आई शिकायतों की जांच कराने पर जोर दिया।
उन्होंने मांग की कि जांच में जिन नागरिकों के नाम गलत तरीके से या निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना हटाए जाने की पुष्टि हो, उनके नाम समयबद्ध तरीके से मतदाता सूची में दोबारा शामिल किए जाएं।
धान खरीद केंद्र चालू कराने और घटतौली रोकने की मांग
किसानों ने ज्ञापन में मांग की कि धान खरीद के सभी क्रय केंद्र चालू किए जाएं, ताकि किसानों को अपनी उपज बेचने में परेशानी न हो। इसके अलावा चीनी मिलों से निकलने वाली मैली किसानों को उचित कीमत पर उपलब्ध कराने तथा गन्ना क्रय केंद्रों पर घटतौली रोकने की मांग भी उठाई।
ये किसान रहे मौजूद
प्रदर्शन में मुकेश जंघाला, बाबूराम तोमर, कोमन सिंह, गजेंद्र सिंह, मुनेन्द्र काकरान, अजय बालियान, नरदेव सिंह, संदीप त्यागी, आशू चौधरी, डॉ. विजय, अरुण कुमार, नीटू चौधरी, रजनीश अहलावत और कवराज सिंह सहित अन्य किसान शामिल रहे।
क्लक्ट्रेट में ही करेंगे प्रदर्शन
जिलाध्यक्ष सुनील प्रधान ने मीडिया से वार्ता करते हुए कहा कि जंतर-मंतर पर बैरिकेडिंग की गई है। उन्होंने दावा किया कि वहां 170 ट्रेनें रद्द कर दी गईं और मेट्रो भी बंद कर दी गई। उनके मुताबिक, बिजनौर में भी कलेक्ट्रेट के गेट पर बैरिकेड लगाकर किसानों को रोकने की कोशिश की गई। उन्होंने कहा कि बिजनौर में पहले भी कलेक्ट्रेट परिसर में धरना-प्रदर्शन होते रहे हैं और आगे भी यहीं प्रदर्शन किया जाएगा।
पुलिस दिखी बेबस
बिजनौर कलक्ट्रेट में धरना-प्रदर्शन पर प्रतिबंध के कारण भाकियू (टिकैत) के प्रदर्शन को देखते हुए बिजनौर क्लक्ट्रेट का लोहे का मजबूत गेट बंद कर दिये गये थे, ताकि भाकियू कार्यकर्ता परिसर में प्रवेश कर धरना नहीं दे सके। पुलिस ने क्लक्ट्रेट के मुख्य गेट पर बैरिकेटिंग भी कर रखी थी। लेकिन भाकियू कार्यकर्ताओ के हूजुम ने पहले बैरिकेटिंग हटाई और फिर लोहे के विशाल गेट पर टूट पड़े, उन्होंने गेट को जोरदार धक्का देकर गेट में लगी लोहे की जंजीर तोड परिसर में घुस गये। इस पूरी घटना के दौरान वहां तैनात पुलिसकर्मी भाकियू कार्यकताओं के सामने बेबस नजर आये।
22 सितंबर के आदेश में कलक्ट्रेट को निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया गया था
जिलाधिकारी एवं जिला मजिस्ट्रेट उमेश प्रताप सिंह ने 22 सितंबर 2026 को कार्यालय आदेश संख्या 1109/जेई-2026 के तहत बिजनौर कलक्ट्रेट परिसर को धरना-प्रदर्शन के लिए पूर्णतः निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया था। आदेश में जनपद मुख्यालय पर धरना-प्रदर्शन, आंदोलन और सार्वजनिक कार्यक्रमों के लिए इंदिरा बाल भवन को निर्धारित स्थल बनाया गया है। यहां भी प्रदर्शन के लिए अनुमति लेना आवश्यक है। प्रशासन ने यह आदेश कानून-व्यवस्था बनाए रखने तथा न्यायालयों और सरकारी कार्यालयों के कामकाज में व्यवधान रोकने के उद्देश्य से जारी किया था।
प्रशासन की ओर से जारी प्रतिबंध संबंधी सूचना कलक्ट्रेट परिसर में पेड़ पर भी टंगी बताई गई है। इसके बावजूद शनिवार को किसानों ने प्रतिबंधित परिसर में प्रवेश कर धरना दिया। इससे आदेश के प्रभावी अनुपालन को लेकर सवाल खड़े हुए हैं।




