नई दिल्ली, 23 अक्टूबर। अरुणाचल प्रदेश में भारत-चीन सीमा पर तनाव की स्थिति को लेकर भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) के महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के बयान के बाद राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कपूर ने कहा है कि पिछले कुछ दिनों में अरुणाचल प्रदेश के कई स्थानों पर भारतीय और चीनी पक्ष आमने-सामने आए हैं और स्थिति बनी हुई है।
उपलब्ध रिपोर्ट के अनुसार, इस वर्ष जुलाई के अंत से अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले के असाफिला और माजा क्षेत्र में गतिरोध की स्थिति बनी हुई है। आईटीबीपी प्रमुख ने हिमवीर सम्मान समारोह के दौरान सीमा पर तैनात जवानों की भूमिका की सराहना की और कहा कि नवगठित शौर्य कमांडो टीमों ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कपूर ने सीमा सुरक्षा से जुड़े संसाधनों के आधुनिकीकरण की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि आईटीबीपी के पास इस्तेमाल हो रहे कुछ हथियार पुराने हैं और ड्रोन तथा ड्रोन-रोधी तकनीक में निवेश बढ़ाने की जरूरत है। उनके अनुसार, चीन ने अपने हथियारों और सुरक्षा ढांचे के आधुनिकीकरण में काफी निवेश किया है।
कांग्रेस ने केंद्र से मांगा जवाब
आईटीबीपी प्रमुख के बयान के बाद कांग्रेस ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि अरुणाचल प्रदेश में सीमा पर जारी तनाव को लेकर सरकार की ओर से पर्याप्त जानकारी नहीं दी जा रही है। कांग्रेस ने प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार से स्थिति पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की है।
कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने भी सीमा पर तनाव और चीन के साथ भारत के संबंधों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने अरुणाचल प्रदेश में गश्त और सीमा प्रबंधन से जुड़ी खबरों का उल्लेख करते हुए सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग की।
विदेश मंत्रालय ने बातचीत को बताया जारी
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) से जुड़े मुद्दों को सुलझाने, गलतफहमियां दूर करने और सीमा पर किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए भारत और चीन के बीच बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि सीमा का बेहतर प्रबंधन और वहां शांति बनाए रखना दोनों देशों के संबंधों को आगे बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण है।




