बिजनौर, राष्ट्रीय पंचायत। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (IARI), पूसा के पूर्व निदेशक एवं कुलपति डॉ. अशोक कुमार सिंह को कृषि क्षेत्र में उनके अभूतपूर्व योगदान के लिए राष्ट्रपति के हाथों ‘पद्म श्री’ पुरस्कार से नवाजा गया है। उन्हें यह प्रतिष्ठित सम्मान बासमती धान की विभिन्न उन्नत प्रजातियों पर किए गए उनके उत्कृष्ट शोध और कृषि सेवाओं के लिए प्रदान किया गया है।

डॉ. सिंह के नेतृत्व में विकसित पूसा बासमती की किस्मों, विशेषकर आयरन और जिंक जैसे पोषक तत्वों से भरपूर ‘पूसा बासमती 1637’ ने न केवल धान की गुणवत्ता में सुधार किया, बल्कि देशभर के करोड़ों किसानों की आय में भी रिकॉर्ड वृद्धि की है। मूल रूप से उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के ग्राम बरहट में जन्मे डॉ. अशोक कुमार सिंह की सफलता की कहानी बेहद प्रेरणादायक है। एक साधारण ग्रामीण परिवेश और संयुक्त परिवार में पले-बढ़े डॉ. सिंह ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा गांव के ही स्कूलों से प्राप्त की।
मेधावी छात्र रहे डॉ. सिंह ने यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट कृषि परीक्षा में प्रदेश में चौथा स्थान प्राप्त कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। इसके बाद उन्होंने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) से स्नातक व परास्नातक किया और पूसा संस्थान से पीएचडी की डिग्री हासिल कर बतौर वैज्ञानिक अपने करियर की शुरुआत की। उनकी काबिलियत का ही परिणाम रहा कि वे संस्थान के सर्वोच्च पद यानी निदेशक/कुलपति तक पहुंचे।
अनुवांशिकी और पादप प्रजनन के विशेषज्ञ डॉ. सिंह को इससे पूर्व वर्ष 2012 में प्रतिष्ठित ‘बोरलॉग पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया जा चुका है। उनके परिवार और मित्रों के अनुसार, वे अत्यंत कर्मठ, व्यवहार कुशल और लगनशील व्यक्तित्व के धनी हैं। उनकी इस उपलब्धि से न केवल गाजीपुर और उत्तर प्रदेश, बल्कि पूरे देश के कृषि जगत में हर्ष की लहर है। जानकारों का मानना है कि डॉ. सिंह का यह सम्मान उन युवा वैज्ञानिकों और कृषि छात्रों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगा जो इस क्षेत्र में देश को आत्मनिर्भर बनाने का सपना देख रहे हैं।