
राष्ट्रीय पंचायत संवाददाता
नजीबाबाद (बिजनौर), 22 जुलाई।
दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया, पश्चिमांचल के प्रदेश महासचिव रहे स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन भारती की स्मृति में मंगलवार को एक श्रद्धांजलि एवं शोक सभा का आयोजन किया गया। सभा में बड़ी संख्या में उपस्थित भिक्षु संघ, धम्म बंधुओं, समाज के प्रबुद्धजनों एवं गणमान्य नागरिकों ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर भावभीनी श्रद्धांजलि दी तथा उनके द्वारा किए गए धम्म, सामाजिक एवं संगठनात्मक कार्यों को श्रद्धापूर्वक स्मरण किया।
कार्यक्रम का शुभारंभ बुद्ध वंदना, त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण के साथ हुआ। उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि डॉ. राकेश मोहन भारती ने अपना संपूर्ण जीवन तथागत भगवान बुद्ध के धम्म तथा भारत रत्न बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के मानवतावादी विचारों के प्रचार-प्रसार के लिए समर्पित कर दिया। उन्होंने समाज में समता, करुणा, मैत्री और बंधुत्व के मूल्यों को स्थापित करने के लिए अनेक धम्म प्रशिक्षण शिविरों, विचार गोष्ठियों एवं जनजागरण अभियानों का सफल संचालन किया। उनका आकस्मिक निधन बौद्ध समाज एवं सामाजिक आंदोलन के लिए अपूरणीय क्षति है।
सभा में वक्ताओं ने कहा कि डॉ. भारती का सादा जीवन, विनम्र व्यवहार, संगठन क्षमता तथा समाज के प्रति उनका समर्पण आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत रहेगा। उनके द्वारा प्रारंभ किए गए धम्म एवं सामाजिक कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
इस अवसर पर दि बुद्धिस्ट सोसायटी ऑफ इंडिया की प्रदेश इकाई के पदाधिकारियों, समता सैनिक दल के पदाधिकारियों तथा क्षेत्र के गणमान्य नागरिकों ने भी अपने श्रद्धासुमन अर्पित किए।
कार्यक्रम में केंद्रीय शिक्षक एवं बौद्ध आचार्य मामराज सिंह बौद्ध, नरेंद्र सिंह बौद्ध, जय सिंह बौद्ध, अतर सिंह बौद्ध, गोविंद सिंह बौद्ध, प्रवेश कुमार, पूजा हॉस्पिटल के प्रबंधक सुभाष चंद्र, अधिवक्ता जितेंद्र कुमार, धर्म सिंह, सुखराम सिंह बौद्ध, दिलीप प्रधान, धनीराम सिंह, मा. मूलचंद सहित अनेक धम्म बंधु एवं समाजसेवी उपस्थित रहे।
धम्म सेवा को बताया अमर विरासत
श्रद्धांजलि सभा के अंत में उपस्थित सभी लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा के प्रति अपनी संवेदना व्यक्त की तथा संकल्प लिया कि डॉ. राकेश मोहन भारती द्वारा समाज में प्रारंभ किए गए धम्म, शिक्षा एवं सामाजिक जागरण के कार्यों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। कार्यक्रम का समापन “नमो बुद्धाय” एवं “जय भीम” के उद्घोष के साथ हुआ।
व्यक्ति का शरीर नश्वर होता है, किंतु उसके आदर्श, सेवा और समाज के लिए किए गए कार्य सदैव जीवित रहते हैं। डॉ. राकेश मोहन भारती का धम्म समर्पित जीवन इसी अमर विरासत का प्रेरक उदाहरण है।

