
वाराणसी। दी बुद्धिस्ट सोसाइटी ऑफ इंडिया (भारतीय बौद्ध महासभा) के संस्थापक बोधिसत्व बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर तथा राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ. भीमराव यशवंत राव अंबेडकर के तत्वावधान में केंद्रीय कमेटी के निर्देशानुसार वर्षावास कार्यक्रम के अंतर्गत 9 अगस्त 2026 को भारत भवन हाल, चेनुवा छित्तूपुर, वाराणसी में “बौद्ध गुफाएं एवं स्तंभ शिलालेख” विषय पर कार्यक्रम आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व पूज्य भन्ते विनय दत्त, राष्ट्रीय सचिव, भिक्खु संघ, चैत्य भूमि दादर, मुंबई एवं प्रज्ञाबुद्ध विहार, ग्राम करहट नरायनपुर, जिला मिर्जापुर ने किया। कार्यक्रम का शुभारंभ तथागत बुद्ध एवं बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर के चित्र पर पुष्पमाला अर्पित कर किया गया। इसके पश्चात त्रिशरण एवं पंचशील ग्रहण कर धम्म देशना दी गई।
कार्यक्रम में मा. रामकुमार व्यास, प्रांतीय कोषाध्यक्ष, पूर्वांचल उत्तर प्रदेश तथा डॉ. रामदुलार बौद्ध, प्रांतीय कार्यालय सचिव, पूर्वांचल उत्तर प्रदेश की गरिमामयी उपस्थिति रही। कार्यक्रम की अध्यक्षता मा. संघप्रिय बंशराज बौद्ध, अध्यक्ष, वाराणसी द्वारा की गई।
बौद्ध विरासत को संरक्षित करने पर जोर
वक्ताओं ने बौद्ध गुफाओं एवं शिलालेखों के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं धम्म संबंधी महत्व पर विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि देशभर में मौजूद बौद्ध गुफाएं, स्तंभ एवं शिलालेख भारत की प्राचीन बौद्ध विरासत और तथागत बुद्ध की धम्म परंपरा के महत्वपूर्ण प्रमाण हैं। नई पीढ़ी को इस ऐतिहासिक विरासत से परिचित कराने तथा इसके संरक्षण के लिए निरंतर प्रयास किए जाने की आवश्यकता है।
कार्यक्रम के आयोजक मा. जितेंद्र कुमार आनंद मैत्रेय ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, धम्म अनुयायियों एवं सहयोगियों का आभार व्यक्त करते हुए सफल आयोजन के लिए धन्यवाद दिया।
कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, बच्चों एवं धम्म अनुयायियों की सहभागिता रही। उपस्थित लोगों ने वर्षावास कार्यक्रम के माध्यम से बौद्ध धम्म, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत के अध्ययन को आगे बढ़ाने का संकल्प लिया।

