– आजादी में बलिदान हुए शख्यितों का योगदान भुलाकर संविधान को ही खत्म करने पर तुली है “सरकार”
– संवाददाता, राष्ट्रीय पंचायत
लखनऊ। गणतंत्र दिवस के अवसर पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने लखनऊ स्थित समाजवादी पार्टी के राज्य मुख्यालय में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस अवसर पर आयोजित समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने संविधान, जनतंत्र, किसानों, पर्यावरण, बेरोजगारी और सामाजिक न्याय के सवालों को केंद्र में रखते हुए मौजूदा सरकार पर गंभीर आरोप लगाए।

अखिलेश यादव ने कहा कि आज गणतंत्र दिवस केवल उत्सव का नहीं, बल्कि संकल्प का दिन है। उन्होंने कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों से आह्वान किया कि देश को मजबूत और खुशहाल बनाने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि भगत सिंह से लेकर महात्मा गांधी तक असंख्य बलिदानों के बाद देश को आजादी मिली और संविधान ने हमें आगे बढ़ने का रास्ता दिखाया, लेकिन आज उसी संविधान की भावना को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी किसान की हालत क्या है, जब कि तरक्की के बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। महंगाई, बेरोजगारी और बुनियादी सुविधाओं की कमी आम जनजीवन को प्रभावित कर रही है।
अंतरराष्ट्रीय हालात का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया अस्थिर दौर से गुजर रही है, कई देशों में वर्षों से युद्ध चल रहे हैं और जबरन हालात को “नॉर्मल” मानने के लिए लोगों को मजबूर किया जा रहा है। ऐसे माहौल में भारत के भीतर भी जनता को लगातार असुरक्षा और अनिश्चितता के बीच जीना पड़ रहा है। पर्यावरण और जल संकट पर चिंता जताते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि आज चारों ओर प्रदूषण फैला हुआ है। देश की करीब सत्तर नदियों के पानी को रेड प्वाइंट श्रेणी में रखा गया है, जिनमें यूरेनियम, आर्सेनिक और मर्करी जैसे खतरनाक तत्व पाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि औद्योगिक कचरा नदियों में छोड़ा जा रहा है और शुद्ध पानी अब कारोबार का विषय बन गया है। निजी कंपनियां पानी बेचने के लिए डर को विज्ञापन का हथियार बना रही हैं, जबकि सरकार मौन है।

स्वास्थ्य व्यवस्था पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि आम आदमी को अस्पतालों में इलाज तक नहीं मिल पा रहा है। उन्होंने एक निजी अस्पताल का उदाहरण देते हुए बताया कि किस तरह पैसों के अभाव में मरीज को डिस्चार्ज नहीं किया जा रहा था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रति व्यक्ति आय के जो आंकड़े पेश किए जाते हैं, वे जमीनी सच्चाई को नहीं दर्शाते।
अखिलेश यादव ने किसानों और असंगठित क्षेत्र की स्थिति पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि बाहर से खाना सप्लाई करने वाला वर्ग आज देश का सबसे बड़ा असंगठित क्षेत्र बन चुका है, जिस पर सर्वाेच्च न्यायालय को भी संज्ञान लेना पड़ा। किसान की आय दुगनी नहीं हुई, बल्कि उसकी पैदावार से मुनाफा कमाने वाले बिचौलिये मजबूत हो गए हैं। उन्होंने विदेशी उत्पादों की बढ़ती मौजूदगी पर सवाल उठाते हुए कहा कि आत्मनिर्भरता के दावे केवल विज्ञापनों तक सीमित रह गए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पौराणिक धरोहरों को संरक्षित करने के बजाय उन्हें तोड़ा है। साथ ही उन्होंने एसआईआर के बहाने एनआरसी लाने की आशंका जताते हुए कहा कि वोट से नागरिकता तय करने की साजिश हो रही है। मतदान से वंचित किया गया तो नागरिकता पर ही सवाल खड़े किए जाएंगे।
गणतंत्र दिवस समारोह में समाजवादी पार्टी के कई वरिष्ठ नेता, सांसद, विधायक, पूर्व मंत्री, पदाधिकारी और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता उपस्थित रहे। प्रमुख रूप से सांसद आरके चौधरी, पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेन्द्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल, विधायक रविदास मेहरोत्रा सहित अनेक वरिष्ठ नेता मंच पर मौजूद रहे। समारोह के माध्यम से समाजवादी पार्टी ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि संविधान, सामाजिक न्याय, पर्यावरण संरक्षण और किसानों के हितों की रक्षा के सवाल पर पार्टी आने वाले समय में और मुखर भूमिका निभाएगी।