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अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग को लेकर दिल्ली उत्तराखंड भवन पर प्रदर्शन

11 जनवरी के उत्तराखंड बंद को सफल बनाने की अपील की गई

बरेली। दिल्ली के प्रगतिशील संगठनों ने अंकिता भंडारी के लिए न्याय की मांग करते हुए दिल्ली के उत्तराखंड भवन पर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के बाद रेजिडेंट कमिश्नर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भी भेजा गया।

ज्ञापन में मुख्यमंत्री महोदय से निम्न मांगें की गई –

1. अंकिता भण्डारी की निर्मम हत्या में शामिल वी.आई.पी. और उससे जुड़े नेताओं की पहचान कर उन पर हत्या का मुकदमा चला कर उन्हें जेल में डाला जाये।

2. अंकिता भण्डारी की हत्या की सी.बी.आई. जांच कराई जाए जिससे हत्या में शामिल वीआईपी के साथ जुड़े दूसरे नेताओं का खुलासा कर उन्हें कठोर से कठोर सजा दी जाए।

3. अंकिता भंडारी के परिजनों को सम्मान जनक बेहतर जीवन के लिए पर्याप्त अतिरिक्त मुआवजा दिया जाए।

4. उत्तराखंड में कामकाजी महिलाओं को अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किया जाए।

5. किसी भी तरह की महिला हिंसा मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट में मुकदमें की सुनवाई कर यथाशीघ्र दोषियों को दण्डित किया जाए।

सभा में वक्ताओं ने कहा कि अंकिता हत्याकांड के तीन साल बाद भी उत्तराखंड सरकार VIP का नाम उजागर नहीं कर रही है। इससे पता चलता है कि उस VIP की सरकार में कितनी ऊंची पहुंच है। सरकार VIP को बचाने की जी तोड़ कोशिश कर रही है लेकिन उत्तराखंड की जनता ने सड़को पर उतरकर साबित कर दिया है कि अंकिता जैसी लड़कियों को न्याय सड़कों से ही मिल सकता है।

वक्ताओं ने आगे कहा कि हमें सिर्फ CBI जांच की मांग तक नहीं रुकना है क्योंकि जिस तरह भाजपा ने देश की हर एक संस्था पर कब्जा कर रखा है उसमें CBI से भी न्याय की उम्मीद करना खुद को धोखे में ही रखना होगा। ऐसे में जब तक अंकिता को न्याय नहीं मिल जाता और VIP समेत, मामले को छुपाने वाले सभी लोग जेल में नहीं जाते तब तक हमें लड़ाई जारी रखनी होगी।
महिलाओं के खिलाफ अपराधों में लिप्त भाजपा के नेताओं की लिस्ट कुलभूषण सिंह, सेंगर से होती हुई काफी आगे तक जाती है।आज भाजपा के “बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ” नारे का असल मतलब बेटियों को भाजपा से बचाओ बन गया है।

प्रदर्शन में प्रगतिशील महिला एकता केंद्र, इंकलाबी मजदूर केन्द्र, परिवर्तनकामी छात्र संगठन, क्रांतिकारी लोक अधिकार संगठन, क्रांतिकारी युवा संगठन, भगत सिंह छात्र युवा मंच, टीयूसीआई, ग्रामीण मजदूर यूनियन आदि संगठनों सहित कई सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद थे।

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