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‘हम समण हैं’ को पुरातन पहचान बताते हुए समण संघ का आह्वान

“इकट्ठा नहीं हुए तो न हम बचेंगे, न संविधान”—संगीति में सामाजिक बिखराव, रोजगार और नशे की बढ़ती समस्या पर चिंता

बिजनौर। शहर के संत शिरोमणि रविदास मंदिर में दूसरे पहर तथा ग्राम फड़ियापुर स्थित डॉ. आंबेडकर धम्मशाला में चौथे पहर समण संघ की संगीति आयोजित की गई। संगीति में सामाजिक एकजुटता, धम्म, रोजगार, युवाओं की बदलती परिस्थितियों तथा समाज में बढ़ते नशे सहित विभिन्न मुद्दों पर विचार-विमर्श किया गया।

संगीति में “हम समण हैं—एकमात्र पुरातन पहचान” के विचार को केंद्र में रखते हुए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लोगों से सामाजिक स्तर पर एकजुट होने का आह्वान किया गया। समण संघ की ओर से कहा गया कि “इकट्ठा नहीं हुए तो न हम बचेंगे, न संविधान।”

76 वर्षों के सामाजिक सफर पर जताई चिंता

समण संघ के वक्ताओं ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लगभग 76 वर्षों में अनेक संगठन, राजनीतिक दल और सामाजिक समूह अस्तित्व में आए, लेकिन उनके अनुसार समाज की मूल समस्याएं समाप्त नहीं हुईं। वक्ताओं ने सामाजिक बिखराव, आपसी दूरी तथा सामाजिक, धार्मिक और राजनीतिक स्तर पर बढ़ते विघटन को चिंता का विषय बताया।

संगीति में कहा गया कि वर्तमान परिस्थितियों में समाज के सामने अनेक नई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं और युवाओं को रोजगार के बदलते स्वरूप के अनुरूप स्वयं को तैयार करने की आवश्यकता है।

मशीन और ऑनलाइन व्यवस्था से बदल रहा रोजगार का स्वरूप

वक्ताओं ने युवाओं के रोजगार को लेकर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि सर्विस सेक्टर में रोजगार के अवसरों का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। कार्यालयों और पारंपरिक रोजगार के स्थान पर मशीनों तथा ऑनलाइन व्यवस्था का विस्तार हो रहा है। वक्ताओं ने रिपेयरिंग जैसे पारंपरिक कार्यों पर भी तकनीकी बदलाव के प्रभाव का उल्लेख करते हुए युवाओं से नए कौशल सीखने और बदलते समय के अनुरूप तैयारी करने का आह्वान किया।

संगीति में यह सवाल भी उठाया गया कि बदलती आर्थिक और तकनीकी परिस्थितियों में युवाओं के लिए रोजगार तथा आत्मनिर्भरता के नए रास्ते कैसे तैयार किए जाएं।

महासमणों के त्याग और संघर्ष को याद किया

संगीति में महासमणों के त्याग, संघर्ष और सामाजिक योगदान को याद करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पूर्वजों ने सामाजिक परिवर्तन और मानव कल्याण के लिए संघर्ष किया। उनके अनुसार नई पीढ़ी को उस संघर्ष की मूल भावना को समझते हुए सामाजिक चेतना, शिक्षा और धम्म के मार्ग को आगे बढ़ाना चाहिए।

वक्ताओं ने समाज में बढ़ते नशे को भी गंभीर चिंता का विषय बताते हुए कहा कि यदि इस पर प्रभावी सामाजिक नियंत्रण नहीं किया गया तो युवाओं का भविष्य प्रभावित हो सकता है। उन्होंने परिवारों और समाज से नशामुक्ति के लिए सामूहिक प्रयास करने का आह्वान किया।

सामाजिक, धम्मिक और राजनीतिक स्तर पर संगठन से जुड़ने का आह्वान

समण संघ की ओर से कहा गया कि सामाजिक जागरूकता और संगठन को मजबूत करने के लिए लोगों को सामाजिक, धम्मिक और राजनीतिक स्तर पर समण संघ से जुड़ने तथा अन्य लोगों को जोड़ने का प्रयास करना चाहिए।

संगीति में समण वेद प्रकाश, समण गजेंद्र सिंह, समण धर्मवीर सिंह, समण कुलदीप, समण कृष्णपाल और समण रतिराम सहित अन्य वक्ताओं ने समण संघ के उद्देश्य, विचारधारा और सामाजिक गतिविधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।

कार्यक्रम के दौरान समण साहित्य, पोस्टर और कैलेंडर का वितरण भी किया गया। अंत में उपस्थित लोगों ने सामूहिक रूप से “संघ नमामि” के उद्घोष के साथ संगीति का समापन किया।

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