

बिजनौर। डॉल्फिन डेर पर सोमवार को बैराज रोड स्थित इन्दिरा पार्क में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। राष्ट्रीय जलीय जीव गंगा डॉल्फिन के संरक्षण और उसके प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से आयोजित इस कार्यक्रम डीडीपीएस स्कूल और कंपोजिट स्कूल हेमराज के विद्यार्थियों ने भी हिस्सा लिया। कार्यक्रम में वन विभाग और डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के अधिकारियों ने विद्यार्थियों को डॉल्फिन के जीवन, उसकी विशेषताओं, उसके सामने मौजूद खतरों और संरक्षण के उपायों की जानकारी दी।
इस मौके पर इन्दिरा पार्क में स्थापित की गई डॉल्फिन की प्रतिमा का भी अनावरण किया गया। कार्यक्रम में क्षेत्रीय वन अधिकारी ’’महेश चंद गौतम’’ ने विद्यार्थियों को बताया कि भारत में नदी और समुद्री क्षेत्रों में डॉल्फिन पाई जाती हैं। मीठे पानी में गंगा और सिंधु नदी क्षेत्र की डॉल्फिन प्रमुख रूप से पाई जाती हैं। उन्होंने बताया कि ’’गंगा डॉल्फिन को भारत का राष्ट्रीय जलीय जीव घोषित किया गया है।’’
उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि डॉल्फिन मछली नहीं, बल्कि ’’स्तनधारी जीव’’ है। यह अपने बच्चों को जन्म देती है और उन्हें दूध पिलाती है। डॉल्फिन की दृष्टि कमजोर होती है, इसलिए वह अल्ट्रासोनिक ध्वनि तरंगों के माध्यम से आसपास की वस्तुओं का पता लगाने, दिशा निर्धारित करने और शिकार करने में मदद लेती है।
कार्यक्रम में डॉल्फिन के सामने मौजूद खतरों पर भी चर्चा की गई। बताया गया कि नदियों में प्रवाहित किया जाने वाला कचरा जलीय जीवों के लिए गंभीर खतरा है। इसके अलावा मछली पकड़ने के लिए लगाए जाने वाले जाल में कई बार डॉल्फिन और उनके बच्चे भी फंस जाते हैं, जिससे उनकी मौत तक हो जाती है।
वन विभाग की ओर से विद्यार्थियों को बताया गया कि डॉल्फिन संरक्षण का सबसे प्रभावी उपाय ’’जन-जागरूकता’’ है। लोगों को नदियों में कचरा नहीं डालने और जलीय जीवों को नुकसान पहुंचाने वाली गतिविधियों से बचने के लिए जागरूक करना जरूरी है।

’’कला प्रतियोगिता में बच्चों ने दिखाई प्रतिभा’’
कार्यक्रम के दौरान डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की ओर से डॉल्फिन संरक्षण विषय पर कला प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। इसमें ’’कंपोजिट स्कूल हेमराज के विद्यार्थियों ने प्रथम, द्वितीय और तृतीय तीनों स्थान हासिल किए।’’

कार्यक्रम में प्रभागीय वनाधिकारी नजीबाबाद ’’पृथ्वीराज’’, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के ’’डॉ. गौरा चंद्र दास’’, डॉ. अमान उल्लाह खान, प्रोजेक्ट ऑफिसर ’’राम अवतार’’, फील्ड असिस्टेंट ’’राजपाल’’, क्षेत्रीय वन अधिकारी ’’महेश चंद गौतम’’, विद्यालय के शिक्षक और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद रहे।
कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को नदियों और उनमें रहने वाले जलीय जीवों के संरक्षण के प्रति संवेदनशील बनाना तथा डॉल्फिन को बचाने के लिए समाज में जागरूकता बढ़ाना रहा।



