कोटद्वार। व्यापारी संजीव टोंक की शिकायत पर गिरफ्तार किए गए दीपक कुमार उर्फ ‘मोहम्मद दीपक’ को एसडीएम कोर्ट से जमानत मिल गई है। दीपक पर व्यापारी के साथ अभद्रता, गाली-गलौज, मारपीट और जान से मारने की धमकी देने के आरोप हैं। गिरफ्तारी के एक दिन बाद शुक्रवार को अदालत ने उन्हें जमानत दे दी।
जमानत के बाद दीपक ने मामले को राजनीति से प्रेरित बताते हुए खुद को फंसाए जाने का आरोप लगाया। उनका कहना है कि उन्होंने व्यापारी से केवल बातचीत कर सोशल मीडिया टिप्पणी का विरोध किया था और कोई मारपीट या हिंसा नहीं की। दीपक ने यह भी दावा किया कि पुलिस पर दबाव बनाया गया, जिसके बाद उनके खिलाफ कार्रवाई हुई।
व्यापारी ने लगाया धमकी और अभद्रता का आरोप
पुलिस के अनुसार, व्यापारी संजीव टोंक ने एक अक्टूबर को कोटद्वार कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि सोशल मीडिया पर एक टिप्पणी को लेकर दीपक उनकी दुकान पर पहुंचे और उनके साथ अभद्रता, गाली-गलौज तथा मारपीट की। व्यापारी ने जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप लगाया।
पुलिस ने शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता की धाराओं 351(2) और 352 के तहत मामला दर्ज किया। जांच के दौरान पुलिस ने धारा 196 और 115 भी जोड़े। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरों और वीडियो की जांच की गई तथा प्रथम दृष्टया गाली-गलौज और धमकी के आरोप सामने आए।
दीपक ने आरोपों को बताया गलत
दीपक ने पुलिस के आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि व्यापारी से उनका पुराना परिचय है और 26 जनवरी की घटना के बाद से दोनों के बीच विवाद चल रहा था। उनका दावा है कि व्यापारी द्वारा लगातार की जा रही टिप्पणियों के कारण उन्होंने केवल इसका विरोध किया था।
दीपक के वकील अरविंद कुमार वर्मा ने भी व्यापारी के आरोपों को खारिज किया। उनका कहना है कि दोनों के बीच कहासुनी हुई थी, लेकिन मारपीट, गाली-गलौज या जान से मारने की धमकी नहीं दी गई।
जनवरी के विवाद के बाद चर्चा में आए थे दीपक
दीपक कुमार इस वर्ष 26 जनवरी में उस समय चर्चा में आए थे, जब उन्होंने एक मुस्लिम दुकानदार के समर्थन में बजरंग दल के सदस्यों से हुए विवाद के दौरान खुद को ‘मोहम्मद दीपक’ बताया था। इसके बाद वह सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहे।
मौजूदा मामला सोशल मीडिया पर की गई एक टिप्पणी के बाद हुए विवाद से जुड़ा बताया जा रहा है।
