बिजनौर, राष्ट्रीय पंचायत। चुनावी प्रक्रियाओं को अक्सर फाइलों और औपचारिकताओं का अंबार माना जाता है, लेकिन बिजनौर ने इस धारणा को जमीनी हकीकत से बदलकर एक नई मिसाल पेश की है। जनपद की जिलाधिकारी जसजीत कौर को ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत किए गए क्रांतिकारी सुधारों और परिणामोन्मुखी कार्यशैली के लिए आगामी 25 जनवरी (राष्ट्रीय मतदाता दिवस) पर महामहिम राष्ट्रपति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा। भारत निर्वाचन आयोग ने उनके द्वारा किए गए कार्यों को ‘ट्रेनिंग कैपेसिटी बिल्डिंग’ श्रेणी में देश भर में सर्वश्रेष्ठ चुना है, जो यह सिद्ध करता है कि अगर नेतृत्व स्पष्ट हो तो तंत्र की जड़ें मजबूत की जा सकती हैं।
बिजनौर में इस सफलता की पटकथा तब लिखी गई जब जिलाधिकारी ने निर्वाचन आयोग के निर्देशों को केवल सरकारी आदेश न मानकर उसे एक मिशन के रूप में लिया। उन्होंने एसआईआर अभियान को दफ्तरों से निकालकर सीधे फील्ड तक पहुंचाया। जहां अक्सर बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) को सिस्टम की सबसे कमजोर कड़ी मान लिया जाता है, वहीं बिजनौर मॉडल ने उन्हें बहु-स्तरीय प्रशिक्षण और निरंतर मार्गदर्शन देकर सिस्टम की सशक्त रीढ़ बना दिया। माइक्रो प्लानिंग को केवल कागजों तक सीमित न रखकर ‘माइक्रो एक्शन’ में बदला गया, जिसके तहत डेटा की शुद्धता, फील्ड रिपोर्ट की सत्यता और फीडबैक पर आधारित सुधारों को प्राथमिकता दी गई।
इस अभियान की एक बड़ी खूबी राजनीतिक अविश्वास को खत्म करना रही। डीएम जसजीत कौर ने राजनीतिक दलों और विभिन्न विभागों के साथ टकराव के बजाय समन्वय का रास्ता चुना और उन्हें प्रशिक्षण प्रक्रिया का हिस्सा बनाया। इसका सुखद परिणाम यह रहा कि मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर किसी विवाद की जगह सर्वसम्मति और विश्वास का माहौल तैयार हुआ। निर्वाचन आयोग की नजर में बिजनौर का यह मॉडल इसलिए भी अलग रहा क्योंकि यह किसी एक दिन की उपलब्धि या ‘फोटो-ऑप’ का परिणाम नहीं था, बल्कि यह लगातार मॉनिटर किए गए प्रशासनिक प्रदर्शन की परिणति है। 25 जनवरी को राष्ट्रपति के हाथों मिलने वाला यह सम्मान उन सभी जिलों के लिए एक संदेश है जहाँ निर्वाचन कार्य आज भी केवल एक्सेल शीट और लक्ष्यपूर्ति तक सिमटे हैं। बिजनौर ने आज देश को दिखाया है कि लोकतंत्र की बुनियाद यानी मतदाता सूची को पारदर्शी और त्रुटिहीन बनाना एक संकल्प से संभव है।