बिजनौर। महात्मा विदुर स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय में विश्व दृष्टि दिवस के अवसर पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रधानाचार्या डॉ. चौधरी ललिता के मार्गदर्शन में अस्पताल परिसर के ओपीडी ब्लॉक में आयोजित कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने आंखों की बीमारियों, उनके लक्षणों, बचाव और समय पर उपचार के महत्व की जानकारी दी। साथ ही आमजन को नेत्रदान के प्रति जागरूक किया गया।
नेत्र रोग विभागाध्यक्ष डॉ. अनुज कुमार ने बताया कि मोबाइल फोन, टैबलेट और अन्य डिजिटल उपकरणों का लंबे समय तक इस्तेमाल आंखों में थकान, सूखापन, सिरदर्द और धुंधला दिखाई देने जैसी समस्याओं का कारण बन सकता है। बच्चों में दृष्टि संबंधी समस्याओं की समय रहते पहचान के लिए नियमित नेत्र परीक्षण जरूरी है।
डॉ. आलोक त्रिपाठी ने लोगों को नेत्रदान के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि नेत्रदान किसी जरूरतमंद व्यक्ति के जीवन में रोशनी लाने का माध्यम बन सकता है। वहीं, डॉ. दिनेश गोस्वामी ने कहा कि समय-समय पर आंखों की जांच कराने से कई बीमारियों की पहचान शुरुआती अवस्था में की जा सकती है, जिससे समय रहते उपचार संभव होता है।
प्रधानाचार्या डॉ. चौधरी ललिता ने कहा कि आंखों से संबंधित बीमारियों और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी होना आवश्यक है। समय पर जांच और उपचार से कई गंभीर समस्याओं को बढ़ने से रोका जा सकता है। उन्होंने विशेष रूप से मधुमेह और उच्च रक्तचाप से पीड़ित लोगों को नियमित नेत्र परीक्षण कराने की सलाह दी, क्योंकि इन बीमारियों का असर आंखों के पर्दे (रेटिना) पर भी पड़ सकता है। उन्होंने नेत्रदान के महत्व पर भी जोर दिया।
मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. रजनीश शर्मा ने ग्लूकोमा (काला मोतिया), आई फ्लू और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी आंखों से संबंधित बीमारियों के लक्षणों, बचाव और उपचार के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दृष्टि संबंधी समस्याओं को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। नियमित जांच और समय पर उपचार से कई मामलों में बीमारी के गंभीर प्रभावों को कम किया जा सकता है।
कार्यक्रम में चिकित्सा अधीक्षक डॉ. सुनील मलिक, डॉ. दिनेश भाटी, डॉ. पूजा, डॉ. विदित दीक्षित, डॉ. रेखा, डॉ. नीलम, डॉ. सारिक, अमरदीप सहित अन्य चिकित्सक, रेजिडेंट डॉक्टर और कर्मचारी उपस्थित रहे।


