लखनऊ, 23 सितंबर। प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र के शंभूपुर गांव में घर में शांति के लिए कराये जा रहे धार्मिक अनुष्ठान महामृत्युंजय जाप के दौरार हुए विवाद में पत्नी और दो पुरोहितों, और इसके बाद अपने मासूम पुत्र की हत्या करने वाले को पुलिस ने मुठभेड़ में मार गिराया।
मारे गए अरविंद सिंह के मामले में अब पारिवारिक विवाद और वर्षों पुरानी रंजिश की कड़ियां भी सामने आ रही हैं। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इस घटनाक्रम की एक महत्वपूर्ण कड़ी अरविंद के बड़े भाई सुनील सिंह की हत्या से जुड़ी है। मीडिया रिपोर्टों में परिवार की ओर से दावा किया गया है कि सुनील की हत्या वर्ष 2018-19 के दौरान हुई थी और इस मामले में अरविंद के चचेरे भाई मनीष सिंह का नाम सामने आया था।
परिवार के सदस्य सूरज सिंह के हवाले से सामने आई जानकारी के अनुसार, सुनील की हत्या के पीछे अरविंद की पत्नी बबीता और मनीष के कथित प्रेम संबंध को लेकर विवाद बताया गया था।

भाई की हत्या के बाद बढ़ा था विवाद
रिपोर्टों के अनुसार, सुनील सिंह की हत्या के मामले में मनीष सिंह और उसके भाई अवनीश का नाम आया था। परिवार की ओर से दावा किया गया है कि दोनों पहले एक अन्य आपराधिक मामले में सजा काट चुके थे और बाद में जेल से बाहर आने के बाद सुनील की हत्या का मामला सामने आया। इस पूरे घटनाक्रम को लेकर परिवार में लंबे समय से तनाव बना हुआ था।
इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि को मंगलवार की घटना से जोड़कर देखा जा रहा है। परिवार के अनुसार, अरविंद अपने भाई की हत्या को लेकर पत्नी बबीता से नाराज था। मंगलवार को घर में धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था, इसी दौरान दोनों के बीच विवाद बढ़ गया।
घर में चल रहा था महामृत्युंजय जाप
पुलिस के अनुसार, अरविंद के घर में पिछले कुछ दिनों से महामृत्युंजय जाप कराया जा रहा था। परिवार की ओर से बताया गया कि अरविंद के भाई की मौत के बाद घर में कथित तौर पर अशांति और भय का माहौल था। इसी कारण धार्मिक अनुष्ठान कराया जा रहा था।
मंगलवार शाम अरविंद के घर लौटने के बाद पूजा करा रहे पुरोहितों से विवाद शुरू हुआ। रिपोर्टों के मुताबिक, उसने पुरोहितों से पहचान पत्र मांगने को लेकर सवाल-जवाब किया। विवाद बढ़ने पर उसने गोली चला दी। इस घटना में उसकी पत्नी बबीता और दो पुरोहितों महेंद्र पाठक तथा अखिलेश मिश्रा की मौत हो गई।
तीन बच्चों को कमरे में लेकर बंद हुआ अरविंद
तीन लोगों की हत्या के बाद अरविंद अपने बच्चों के साथ घर के एक कमरे में बंद हो गया। पुलिस के अनुसार, कमरे में उसके तीन बच्चे मौजूद थे। पुलिस टीम ने उसे आत्मसमर्पण करने और बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए कई घंटे तक समझाने का प्रयास किया। इस दौरान परिवार के लोगों की मदद भी ली गई।
पुलिस के अनुसार, इसी दौरान कमरे के अंदर से गोली चलने की आवाज आई। बाद में पता चला कि अरविंद ने अपने बेटे को गोली मार दी थी। घायल बच्चे को तत्काल अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी भी मौत हो गई।
पुलिस पर फायरिंग के बाद जवाबी कार्रवाई
आजमगढ़ के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. अनिल कुमार के अनुसार, बच्चों की सुरक्षा को देखते हुए पुलिस ने कमरे में प्रवेश करने की कार्रवाई की। दरवाजा तोड़कर पुलिस टीम अंदर पहुंची तो अरविंद ने पुलिस पर फायरिंग कर दी। पुलिस का कहना है कि आत्मरक्षा और बच्चों को सुरक्षित निकालने के लिए जवाबी फायरिंग की गई, जिसमें अरविंद घायल हो गया। अस्पताल ले जाने पर चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया।




