– प्रस्तुति : ऐश्वर्या, कक्षा : 5
15 अगस्त प्रत्येक भारतीय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण और गौरवपूर्ण दिन है। इसी दिन वर्ष 1947 में भारत ब्रिटिश शासन से स्वतंत्र हुआ था। स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर हम उन महान स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक याद करते हैं, जिन्होंने देश की आजादी के लिए अपना जीवन बलिदान कर दिया।
स्वतंत्रता संग्राम की ऐसी ही महान वीरांगना थीं झांसी की रानी लक्ष्मीबाई। उनका जन्म 19 नवंबर 1828 को वाराणसी में हुआ था। उनके बचपन का नाम मणिकर्णिका था और उन्हें प्यार से मनु कहा जाता था। बचपन से ही वे अत्यंत साहसी और निडर थीं। उन्होंने घुड़सवारी, तलवारबाजी और तीरंदाजी जैसी युद्धकलाओं में दक्षता हासिल की।
महाराजा गंगाधर राव से विवाह के बाद मणिकर्णिका झांसी की रानी लक्ष्मीबाई बनीं। वर्ष 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध अदम्य साहस के साथ युद्ध किया और अपनी झांसी की रक्षा के लिए पूरी शक्ति से संघर्ष किया। उन्होंने कभी हार नहीं मानी और देशभक्ति तथा वीरता की अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की। मातृभूमि की रक्षा करते हुए उन्होंने अपने प्राणों का बलिदान दिया।
स्वतंत्रता दिवस हमें रानी लक्ष्मीबाई जैसे महान स्वतंत्रता सेनानियों के त्याग और बलिदान की याद दिलाता है। इस दिन विद्यालयों और विभिन्न संस्थानों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है, देशभक्ति के गीत गाए जाते हैं तथा स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धापूर्वक नमन किया जाता है।
रानी लक्ष्मीबाई का साहस और देशप्रेम आज भी हम सभी के लिए प्रेरणास्रोत है। उनका जीवन हमें अपने देश से प्रेम करने, साहस के साथ आगे बढ़ने और हमेशा सही के लिए खड़े रहने की प्रेरणा देता है।
