रालोद नेता डॉ. नीरज चौधरी के खिलाफ कानपुर में प्राथमिकी
रिसॉर्ट में महिला और उसके पति से मारपीट, धमकाने और जबरन कार में ले जाने का आरोप; न्यायालय के आदेश पर दर्ज हुई रिपोर्ट
बिजनौर। राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) नेता डॉ. नीरज चौधरी के खिलाफ कानपुर में प्राथमिकी दर्ज होने का मामला सामने आया है। प्रकाशित समाचार के अनुसार, कानपुर के चकेरी थाना क्षेत्र में न्यायालय के आदेश पर दर्ज कराई गई रिपोर्ट में एक महिला ने डॉ. नीरज चौधरी समेत अन्य लोगों पर उसके और उसके पति के साथ कथित मारपीट, धमकाने तथा जबरन कार में ले जाने का आरोप लगाया है।
कानपुर के रिसॉर्ट में घटना का आरोप
शिकायतकर्ता के अनुसार, वह अपने पति के साथ कानपुर स्थित एक रिसॉर्ट में ठहरी हुई थीं। आरोप है कि 25 अप्रैल को सुबह करीब 8:30 बजे कुछ लोग वहां पहुंचे और उनके साथ कथित तौर पर अभद्रता एवं मारपीट की। महिला का आरोप है कि विरोध करने पर उसे जबरन कार में बैठाकर ले जाने का प्रयास किया गया।
शिकायत के मुताबिक, महिला ने कार की खिड़की खोलकर शोर मचाया, जिसके बाद आसपास मौजूद लोगों का ध्यान घटना की ओर गया। मामले की सूचना पुलिस को दिए जाने की भी बात कही गई है।
सीसीटीवी फुटेज होने का दावा
महिला ने अपनी शिकायत में घटना से संबंधित सीसीटीवी फुटेज उपलब्ध होने का दावा किया है। शिकायत के अनुसार, पुलिस के मौके पर पहुंचने के बाद महिला और उसके पति को थाने ले जाया गया।
समाचार रिपोर्ट में आरोप लगाया गया है कि महिला और उसके पति ने पुलिस के समक्ष न्यायालय का अग्रिम जमानत आदेश प्रस्तुत किया। बाद में जमानतनामा दाखिल किए जाने के बाद उन्हें जाने दिया गया।
न्यायालय के आदेश के बाद दर्ज हुई प्राथमिकी
महिला ने घटना को लेकर न्यायालय का दरवाजा खटखटाया। प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, न्यायालय के आदेश के बाद कानपुर के चकेरी थाने में डॉ. नीरज चौधरी समेत अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। मामले में पुलिस की जांच के दौरान शिकायत में लगाए गए आरोपों, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
बिजनौर के कथित धोखाधड़ी मामले का भी उल्लेख
प्रकाशित समाचार में डॉ. नीरज चौधरी से जुड़े बिजनौर के एक पुराने मामले का भी उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2025 में बिजनौर में सौर ऊर्जा प्लांट लगाने के नाम पर करीब 5.40 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी के आरोप में प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इस मामले में पुलिस द्वारा कार्रवाई की गई थी और बाद में कानपुर से संबंधित आरोपियों की तलाश में पुलिस टीम पहुंची थी।
आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायालय से होगी
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि किसी प्राथमिकी में लगाए गए आरोप अदालत में सिद्ध अपराध नहीं होते। डॉ. नीरज चौधरी अथवा अन्य आरोपियों की दोषसिद्धि तभी मानी जाएगी, जब न्यायिक प्रक्रिया में आरोप प्रमाणित हों। राष्ट्रीय पंचायत की पत्रकारिता नीति के तहत इस मामले में पुलिस का आधिकारिक पक्ष और डॉ. नीरज चौधरी का जवाब सामने आने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाना चाहिए।



