
ग्रेटर नोएडा/जेवर। देश के बहुप्रतीक्षित **नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट, जेवर** में मंगलवार को हुई तेज बारिश के बाद टर्मिनल और पार्किंग क्षेत्र को जोड़ने वाले मार्ग पर जलभराव का मामला सामने आया। जलभराव का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने के बाद एयरपोर्ट की ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर सवाल उठने लगे। कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे लेकर एयरपोर्ट को लेकर व्यंग्यात्मक टिप्पणियां भी कीं। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक पानी पूरे एयरपोर्ट परिसर में नहीं भरा था, बल्कि एक सीमित हिस्से में बारिश का पानी जमा हुआ था।
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कुछ देर की तेज बारिश और रास्ते पर जमा हो गया पानी
मंगलवार को क्षेत्र में हुई भारी बारिश के बाद एयरपोर्ट के टर्मिनल से पार्किंग क्षेत्र की ओर जाने वाले रास्ते पर पानी जमा हो गया। वायरल वीडियो में यात्रियों और अन्य लोगों को जलभराव वाले हिस्से से गुजरते हुए देखा गया। इसी के बाद सोशल मीडिया पर एयरपोर्ट की जल निकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा तेज हो गई।
यह स्थिति इसलिए भी चर्चा में आई क्योंकि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को आधुनिक सुविधाओं और अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे से लैस बड़े अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के रूप में विकसित किया गया है। ऐसे में मानसून की तेज बारिश के दौरान प्रवेश और आवाजाही वाले हिस्से में पानी जमा होने को लेकर लोगों ने सवाल उठाए।
जलभराव की तस्वीरें और वीडियो सामने आने के बाद एयरपोर्ट प्रबंधन ने स्थिति स्पष्ट करते हुए बताया कि *अत्यधिक बारिश कम समय में होने के कारण टर्मिनल और पार्किंग के बीच के मार्ग पर अस्थायी रूप से पानी जमा हुआ था।*
टीम ने मौके पर कार्रवाई करते हुए पानी को करीब 30 मिनट में साफ कर दिया। महत्वपूर्ण बात यह रही कि इस घटना से फ्लाइट ऑपरेशन और एयरपोर्ट की अन्य सेवाएं प्रभावित नहीं हुईं।
इससे यह भी स्पष्ट होता है कि वायरल वीडियो में दिखाई दे रहा जलभराव एयरपोर्ट के पूरे परिसर में बाढ़ जैसी स्थिति नहीं थी, बल्कि एक सीमित मार्ग पर पानी जमा होने की घटना थी।
ड्रेनेज व्यवस्था पर क्यों उठे सवाल?
हालांकि पानी जल्दी साफ कर दिया गया, लेकिन घटना ने एयरपोर्ट की **बारिश के पानी की निकासी और मानसूनी तैयारियों** पर बहस जरूर शुरू कर दी है। एयरपोर्ट जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय परिवहन केंद्र में टर्मिनल, पार्किंग, एप्रोच रोड और यात्रियों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में जल निकासी व्यवस्था बेहद महत्वपूर्ण होती है। भारी बारिश के दौरान कम समय में बड़ी मात्रा में पानी गिरने पर ड्रेनेज सिस्टम की क्षमता की वास्तविक परीक्षा होती है।
आधुनिक एयरपोर्ट, लेकिन बारिश की चुनौती भी बड़ी
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट को अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ विकसित किया गया है। मार्च 2026 में नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने एयरपोर्ट को एयरोड्रोम लाइसेंस जारी किया था। इसे सार्वजनिक उपयोग और हर मौसम में संचालन के लिए लाइसेंस दिया गया है। एयरपोर्ट के पास 3,900 मीटर लंबा रनवे है और इसे 24 घंटे संचालन की क्षमता के अनुरूप विकसित किया गया है।
ऐसे में मंगलवार की बारिश के बाद सामने आया जलभराव भले ही सीमित और अस्थायी रहा हो, लेकिन इसने मानसून के दौरान एयरपोर्ट की सतही जल निकासी व्यवस्था को लेकर चर्चा जरूर छेड़ दी है।
लेकिन घटना का दूसरा पहलू यह है कि भविष्य में इससे कहीं अधिक तेज या लंबे समय तक बारिश होने पर जल निकासी व्यवस्था किस तरह काम करेगी?** क्या टर्मिनल और पार्किंग के बीच ऐसे सभी स्थानों की जल निकासी क्षमता पर्याप्त है? क्या अत्यधिक बारिश के लिए वैकल्पिक ड्रेनेज और पंपिंग व्यवस्था तैयार है? और क्या मानसून के दौरान ऐसे स्थानों की नियमित निगरानी की जा रही है?
इन सवालों के जवाब एयरपोर्ट के लंबे समय तक सुरक्षित और सुचारु संचालन के लिहाज से महत्वपूर्ण होंगे।
फिर भी वायरल वीडियो ने एक अहम मुद्दा सामने ला दिया हैआधुनिक एयरपोर्ट की असली परीक्षा केवल विमान संचालन में नहीं, बल्कि अत्यधिक मौसम की परिस्थितियों में उसके बुनियादी ढांचे की मजबूती में भी होती है। आने वाले मानसून में एयरपोर्ट की ड्रेनेज व्यवस्था किस तरह प्रदर्शन करती है, इस पर निगाह रहेगी।

