लेखक : डॉ. जितेन्द्र पासवान
नई दिल्ली। आज 20 अगस्त, अक्षय ऊर्जा दिवस के अवसर पर देश में स्वच्छ और नवीकरणीय ऊर्जा की बढ़ती संभावनाओं के बीच SC-ST समाज की नई पीढ़ी के लिए अक्षय ऊर्जा उद्योग एक महत्वपूर्ण आर्थिक अवसर बनकर सामने आ रहा है। सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज, बायो-एनर्जी और ग्रीन हाइड्रोजन जैसे क्षेत्रों में आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर निवेश, तकनीकी विकास और रोजगार की संभावनाएं हैं।

अक्षय ऊर्जा का अर्थ उन ऊर्जा स्रोतों से है जो प्राकृतिक रूप से लगातार उपलब्ध होते रहते हैं—जैसे सूर्य, हवा, पानी और जैविक पदार्थ। भारत की ऊर्जा नीति में इन स्रोतों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
भारत की ऊर्जा तस्वीर तेजी से बदल रही है
भारत ने अक्षय ऊर्जा के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के अनुसार 30 जून 2026 तक भारत की कुल नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता करीब 288.59 GW पहुंच चुकी थी। इसमें सौर ऊर्जा की क्षमता 162.15 GW और पवन ऊर्जा की क्षमता 57.44 GW थी।
भारत ने 2030 तक 500 GW गैर-जीवाश्म आधारित बिजली क्षमता हासिल करने का लक्ष्य रखा है। यह लक्ष्य केवल सौर और पवन ऊर्जा तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अन्य गैर-जीवाश्म स्रोत भी शामिल हैं। भारत का दीर्घकालीन नेट-जीरो उत्सर्जन लक्ष्य 2070 है।
सौर ऊर्जा : सबसे बड़ा कारोबारी अवसर
सोलर पैनल निर्माण से लेकर रूफटॉप सोलर, सोलर पंप, इन्वर्टर, बैटरी, इंस्टॉलेशन और मेंटेनेंस तक अनेक स्तरों पर उद्यमिता के अवसर हैं।
छोटे उद्यमी सोलर इंस्टॉलेशन और सर्विस सेंटर से शुरुआत कर सकते हैं, जबकि बड़े निवेशक मैन्युफैक्चरिंग और सोलर परियोजनाओं की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
पवन ऊर्जा और नई तकनीक
तमिलनाडु, गुजरात, कर्नाटक और अन्य राज्यों में पवन ऊर्जा की अच्छी संभावनाएं हैं। भविष्य में ऑफशोर विंड एनर्जी और हाइब्रिड सोलर-विंड परियोजनाएं भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।
इस क्षेत्र में टर्बाइन के साथ-साथ इंजीनियरिंग, सर्विसिंग, उपकरण निर्माण और तकनीकी प्रशिक्षण के अवसर भी बढ़ेंगे।
बैटरी और एनर्जी स्टोरेज बनेगा अगला बड़ा बाजार
सौर ऊर्जा दिन में अधिक उपलब्ध होती है, जबकि बिजली की मांग कई बार शाम और रात में बढ़ती है। इसलिए Battery Energy Storage System (BESS) और अन्य ऊर्जा भंडारण तकनीक भविष्य के ऊर्जा बाजार के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं।
एससी/एसटी के तकनीकी युवा बैटरी सर्विसिंग, ऊर्जा प्रबंधन सॉफ्टवेयर, सोलर स्टोरेज सिस्टम और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी से जुड़े व्यवसायों में भी प्रवेश कर सकते हैं।
ग्रीन हाइड्रोजन में भी बड़ा भविष्य
भारत ने National Green Hydrogen Mission के माध्यम से ग्रीन हाइड्रोजन को बढ़ावा देने की दिशा में कदम उठाया है। मिशन का लक्ष्य 2030 तक भारत को ग्रीन हाइड्रोजन के उत्पादन, उपयोग और निर्यात का प्रमुख केंद्र बनाना है।
इस क्षेत्र में इलेक्ट्रोलाइजर, नवीकरणीय बिजली, स्टोरेज, परिवहन और औद्योगिक उपयोग से जुड़े नए व्यवसाय विकसित हो सकते हैं।
कचरे और गोबर से भी बनेगी ऊर्जा
बायोगैस, बायो-CNG और Waste-to-Energy ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में रोजगार के अवसर पैदा कर सकते हैं।
गांवों में पशुओं के गोबर और कृषि अवशेषों से बायोगैस तैयार करना तथा शहरों में जैविक कचरे का वैज्ञानिक उपयोग स्थानीय स्तर पर ऊर्जा और आय का स्रोत बन सकता है।
एससी/एसटी युवाओं के लिए पांच बड़े अवसर
अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में नई पीढ़ी निम्न क्षेत्रों से शुरुआत कर सकती है—
1. सोलर रूफटॉप इंस्टॉलेशन
घरों, दुकानों और छोटे उद्योगों में सोलर सिस्टम लगाना।
2. सोलर पंप और कृषि ऊर्जा
किसानों के लिए सौर ऊर्जा आधारित सिंचाई समाधान।
3. बैटरी और स्टोरेज सर्विस
बैटरी पैक, रखरखाव और ऊर्जा प्रबंधन से जुड़े व्यवसाय।
4. सोलर उपकरण एवं मैन्युफैक्चरिंग
पैनल, स्ट्रक्चर, वायरिंग और अन्य सहायक उपकरणों का निर्माण।
5. बायोगैस और वेस्ट-टू-एनर्जी
गोबर और कृषि अवशेषों को ऊर्जा एवं जैविक खाद में बदलना।
सरकारी योजनाओं से भी मिल सकता है सहयोग
केंद्र सरकार अक्षय ऊर्जा के विस्तार के लिए PM-Surya Ghar, PM-KUSUM, Green Energy Corridor, National Green Hydrogen Mission तथा विभिन्न विनिर्माण प्रोत्साहन योजनाओं के माध्यम से क्षेत्र को बढ़ावा दे रही है। पात्रता और सहायता परियोजना के प्रकार के अनुसार अलग-अलग होती है।
अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में 100 प्रतिशत FDI की अनुमति भी स्वचालित मार्ग के तहत उपलब्ध है, जिससे बड़े निवेश और वैश्विक भागीदारी के अवसर बढ़ते हैं।
चुनौतियां भी समझना जरूरी
अक्षय ऊर्जा में अवसर बड़े हैं, लेकिन यह आसान पैसा कमाने वाला क्षेत्र नहीं है। भूमि, ग्रिड कनेक्शन, तकनीकी दक्षता, पूंजी, बैटरी लागत, गुणवत्ता मानक और बाजार प्रतिस्पर्धा जैसी चुनौतियों को समझना जरूरी है।
इसलिए किसी भी परियोजना में निवेश से पहले तकनीकी सर्वे, लागत का आकलन, सरकारी नियम और संभावित बाजार की जानकारी जरूर प्राप्त करनी चाहिए।
अक्षय ऊर्जा से आर्थिक आत्मनिर्भरता की ओर
अक्षय ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का क्षेत्र नहीं है। यह ऊर्जा सुरक्षा, रोजगार, तकनीकी नवाचार, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक आत्मनिर्भरता से जुड़ा हुआ पूरा उद्योग है।
एससी/एसटी समाज की नई पीढ़ी यदि शिक्षा, तकनीक और उद्यमिता को साथ लेकर इस क्षेत्र में प्रवेश करती है तो आने वाले वर्षों में सोलर इंजीनियर, टेक्नीशियन, निर्माता, इंस्टॉलर, ऊर्जा सलाहकार और अक्षय ऊर्जा उद्यमी के रूप में नई पहचान बनाई जा सकती है।
भारत ने 2025 में अपनी कुल स्थापित बिजली क्षमता का 50 प्रतिशत गैर-जीवाश्म स्रोतों से हासिल कर लिया था और मार्च 2026 तक गैर-जीवाश्म क्षमता 283.46 GW तक पहुंच चुकी थी।
अब समय है ऊर्जा उपभोक्ता से ऊर्जा उद्यमी बनने का।
“सूर्य की शक्ति अपनाएं, स्वच्छ ऊर्जा बढ़ाएं;
एससी/एसटी की नई पीढ़ी को उद्यमी बनाएं।”
अक्षय ऊर्जा दिवस पर संकल्प
स्वच्छ ऊर्जा • हरित रोजगार • तकनीकी आत्मनिर्भरता • आर्थिक सशक्तीकरण
(दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की ओर से जनहित में जारी।)


