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अब बद्रीनाथ मंदिर में भी उजागर हुई चढ़ावे में हेराफेरी

निलंबित कर्मचारी गिरफ्तार, सरकार ने बनाई उच्चस्तरीय समिति; श्रद्धालुओं के दान की पारदर्शिता पर नई बहस

देहरादून/बद्रीनाथ। उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित विश्व प्रसिद्ध राम मंदिर में चढ़ावे की कथित हेराफेरी का मामला अभी चर्चा में ही था कि अब उत्तराखंड के बद्रीनाथ धाम में भी चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। 2 जुलाई को थाली भेंट की गणना के दौरान कथित अनियमितता की सूचना सामने आने के बाद मामला मंदिर समिति की आंतरिक जांच से निकलकर पुलिस, एसआईटी और राज्य सरकार की उच्चस्तरीय जांच तक पहुंच गया है।

बताया जा रहा है कि बद्रीनाथ धाम का यह मामला केवल एक कथित चोरी या वित्तीय अनियमितता तक सीमित नहीं है। यह देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में दान-चढ़ावे की निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही की व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। अब सबकी निगाह एसआईटी जांच और राज्य सरकार की उच्चस्तरीय समिति की रिपोर्ट पर टिकी है, जो आने वाले दिनों में मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण संकेत दे सकती है।

शिकायत से शुरू हुआ विवाद

3 जुलाई को एक सामाजिक संगठन की ओर से श्री बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति के मुख्य कार्याधिकारी को लिखित शिकायत दी गई। शिकायत में चढ़ावे की गणना और प्रबंधन में कथित गड़बड़ी का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और एफआईआर की मांग की गई।

शिकायत के बाद मंदिर समिति ने आंतरिक जांच शुरू की और प्रारंभिक जांच में अनियमितता के संकेत मिलने पर कर्मचारी प्रमोद नौटियाल को निलंबित कर दिया गया।

पुलिस और एसआईटी की कार्रवाई

8 जुलाई को प्रभारी मंदिर अधिकारी युद्धवीर पुष्पवान की तहरीर पर बद्रीनाथ थाने में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद चमोली पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित किया गया।

पुलिस के अनुसार सीसीटीवी फुटेज और गवाहों के बयानों के आधार पर एसआईटी ने 12 जुलाई की रात प्रमोद नौटियाल को देहरादून स्थित उनके आवास से गिरफ्तार किया। जांच एजेंसी का दावा है कि फुटेज में नकदी और अन्य भेंट सामग्री को कथित तौर पर अलग ले जाते हुए देखा गया है। हालांकि इन आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय की प्रक्रिया के बाद ही होगी।

राजनीतिक बयानबाज़ी भी तेज

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने मांग की है कि जांच का दायरा केवल एक कर्मचारी तक सीमित न रखा जाए और जिम्मेदारी तय करने के लिए उच्च स्तर की भूमिका भी देखी जाए।

वहीं भाकपा (माले) के राज्य सचिव इन्द्रेश मैखुरी ने भी व्यापक जांच की मांग की है। दूसरी ओर मंदिर समिति अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा है कि संबंधित कर्मचारी समिति का नियमित कर्मचारी है और जांच के आधार पर निलंबन, एफआईआर और गिरफ्तारी की कार्रवाई की जा चुकी है।

मुख्यमंत्री धामी ने दिए सख्त निर्देश

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मामले को श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए विस्तृत जांच के निर्देश दिए हैं। राज्य सरकार ने गढ़वाल मंडल आयुक्त की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जिसे 15 दिन में रिपोर्ट सौंपनी होगी।

“श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।”
– पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री उत्तराखंड

 

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