
अयोध्या। राम मंदिर में चढ़ावे की चोरी और कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने रविवार को पूर्व कारसेवक और हिंदूवादी नेता संतोष दुबे से पूछताछ की। संतोष दुबे इस मामले को लेकर लगातार सार्वजनिक रूप से सवाल उठाते रहे हैं और उन्होंने मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों की भूमिका पर भी संदेह जताया था।
सूत्रों के अनुसार एसआईटी ने उनसे चढ़ावे की नकदी व्यवस्था, सुरक्षा प्रणाली और उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार से जुड़े कई सवाल पूछे। पूछताछ का उद्देश्य मामले से संबंधित तथ्यों और उपलब्ध सूचनाओं की पुष्टि करना बताया जा रहा है।
राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण अब केवल चोरी की जांच तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि वित्तीय प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था की पारदर्शिता का भी बड़ा प्रश्न बनता जा रहा है। एसआईटी की आगे की कार्रवाई और संभावित नई पूछताछ पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं।
जांच का दायरा बढ़ा
राज्य सरकार द्वारा गठित एसआईटी पहले ही मंदिर प्रशासन से जुड़े कर्मचारियों, नकदी गिनने की प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों और शिकायतकर्ताओं से पूछताछ कर चुकी है। जांच एजेंसी अब उन सभी सूचनाओं को जोड़कर वित्तीय अनियमितताओं की पूरी कड़ी समझने की कोशिश कर रही है।
आठ आरोपितों की हिरासत बढ़ी
इस मामले में एसआईटी अब तक आठ लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है। सोमवार को अदालत ने सभी आरोपितों की न्यायिक हिरासत 14 दिन के लिए बढ़ा दी। हालांकि जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि मामले की जांच अभी जारी है और आगे भी कई लोगों से पूछताछ की जा सकती है।
क्या हैं आरोप?
चढ़ावे की राशि के प्रबंधन और नकदी व्यवस्था में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए गए हैं। संतोष दुबे ने सार्वजनिक रूप से दावा किया था कि इस मामले में कुछ जिम्मेदार पदों पर रहे लोगों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। हालांकि जिन व्यक्तियों के नाम उन्होंने लिए हैं, उनके खिलाफ अभी तक किसी अदालत द्वारा दोष सिद्ध नहीं किया गया है।
