
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने के लिए राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने का समय दिया है। अदालत ने इस अवधि के दौरान निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक के रूप में कार्य करते रहने की अनुमति भी दी है।
न्यायमूर्ति अजीत कुमार और न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की खंडपीठ ने बुधवार को करीब तीन घंटे की सुनवाई के बाद यह आदेश दिया। पंचायत चुनाव की प्रक्रिया में देरी और निवर्तमान ग्राम प्रधानों की प्रशासक के रूप में नियुक्ति को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई की गई।
याचिकाकर्ता एवं अधिवक्ता इम्तियाज हुसैन के अनुसार, उन्होंने फरवरी 2026 में पंचायत चुनाव का कार्यक्रम घोषित करने की मांग को लेकर याचिका दाखिल की थी। उनका कहना था कि पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के करीब होने के बावजूद मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की समयसीमा बार-बार बढ़ाए जाने के कारण चुनाव प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
बाद में पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने पर राज्य सरकार ने निवर्तमान ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त कर दिया। इन नियुक्तियों को भी अदालत में चुनौती दी गई थी। अधिवक्ता दशरथ यादव सहित अन्य याचिकाकर्ताओं की याचिकाओं पर भी सुनवाई हुई।
हाईकोर्ट ने राज्य सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग को तीन महीने के भीतर पंचायत चुनाव कराने का निर्देश दिया है। आदेश के अनुसार, चुनाव संपन्न होने तक निवर्तमान ग्राम प्रधान प्रशासक के रूप में कार्य करते रह सकेंगे।



