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नीला ड्रम हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को मृत्युदंड

सजा सुनाए जाने से पहले अदालत के सवाल पर दोनों रहे मौन, बाद में मांगी कम सजा; बचाव पक्ष ने बेटियों के भविष्य का दिया हवाला

मेरठ। चर्चित सौरभ राजपूत हत्याकांड में जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत ने बुधवार को मुस्कान रस्तोगी और साहिल शुक्ला को मृत्युदंड की सजा सुनाई। सजा का फैसला सुनते ही दोनों भावुक हो गए। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सजा सुनाए जाने से पहले अदालत ने दोनों को अपनी बात रखने का अवसर दिया था। शुरुआत में दोनों ने कुछ कहने से इनकार किया, लेकिन बाद में मुस्कान ने अपनी दोनों बेटियों का हवाला देते हुए कम सजा देने की अपील की। साहिल ने भी अदालत से नरमी बरतने का अनुरोध किया।

इस मामले में अदालत ने 30 सितंबर 2026 को मुस्कान और साहिल को सौरभ राजपूत की हत्या तथा साक्ष्य मिटाने के आरोपों में दोषी ठहराया था। सजा पर सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने वारदात की गंभीरता और शव को छिपाने के तरीके का हवाला देते हुए मृत्युदंड की मांग की। वहीं, बचाव पक्ष ने मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य और परवरिश का तर्क देते हुए कम सजा देने की अपील की।

ऐसे खुला था नीला ड्रम हत्याकांड

पुलिस के अनुसार, 18 मार्च 2025 को सौरभ राजपूत के भाई बबलू ने उनके लापता होने की सूचना दी थी। शिकायत में मुस्कान और साहिल पर संदेह जताया गया था। पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की। जांच के दौरान घर में रखे नीले ड्रम से सौरभ का शव बरामद हुआ। इसके बाद यह मामला देशभर में चर्चा का विषय बन गया।

नशीली दवा देकर हत्या करने का आरोप

पुलिस की जांच के मुताबिक, वारदात वाली रात सौरभ अपनी मां के घर से कोफ्ते की सब्जी लेकर आया था। अभियोजन के अनुसार, आरोप है कि मुस्कान ने सब्जी में नशीली दवा मिला दी थी। सौरभ के बेसुध होने के बाद साहिल को घर बुलाया गया और फिर उसकी हत्या कर दी गई। जांच में शव के टुकड़े कर उन्हें छिपाने तथा नीले ड्रम में सीमेंट का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई।

परिस्थितिजन्य और फॉरेंसिक साक्ष्यों पर टिका मामला

अभियोजन पक्ष के अनुसार, मामले में चश्मदीद गवाह नहीं होने के कारण परिस्थितिजन्य, इलेक्ट्रॉनिक और फॉरेंसिक साक्ष्य अहम रहे। पुलिस ने मोबाइल फोन की कॉल डिटेल, लोकेशन, होटल के रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की जांच की। कैब चालक से पूछताछ भी जांच का हिस्सा रही। अभियोजन ने इन साक्ष्यों के आधार पर अदालत में अपना पक्ष रखा।

बेटियों के भविष्य का दिया हवाला

सजा पर सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने मुस्कान की दोनों बेटियों के भविष्य और पालन-पोषण का हवाला देते हुए अदालत से नरमी बरतने की अपील की। वहीं, अभियोजन पक्ष ने अपराध की गंभीरता और शव छिपाने के तरीके को आधार बनाकर कड़ी सजा की मांग की। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मृत्युदंड का फैसला सुनाया।

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