दिल्ली प्रदर्शनः दिपके, नेहा बोरा, केजरिवाल, ममता बनर्जी हिरासत में
पुलिस व प्रदर्शनकारियो के बीच दिनभर लुका-छिपी का खेल रहा जारी

नई दिल्ली। कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के आह्वान पर जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर शनिवार प्रदर्शन के दौरान दिन भर जंतर-मंतर व उसके अपास के इलाको में पुलिस व प्रदर्शकारियों के बीच लुका-छिपी का खेल जारी रहा। पुलिस ने बड़े पैमाने पर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के लिए जमा हुए प्रदर्शकारियों को हिरासत में ले लिया। विपक्ष ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए, जबकि प्रदर्शनकारियों ने इसे शांतिपूर्ण विरोध को रोकने की कोशिश बताया।
प्रदर्शन को लेकर मध्य दिल्ली के कई इलाकों में आवाजाही पर प्रतिबंध लगाए गए और भारी संख्या में सुरक्षा बलो की तैनाती की गई है। 50 से अधिक मेट्रो स्टेशनों के प्रवेश-निकास द्वार बंद किए गए। जनपथ और कर्तव्य पथ के आसपास मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर भी अस्थायी रोक लगाए जाने की खबरें सामने आईं। पुलिस की कार्रवाई के कारण राजधानी के कई हिस्सों में यातायात और सामान्य आवाजाही प्रभावित हुई।

राहुल गांधी ने वीडियो संदेश से किया समर्थन
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी शनिवार को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल नहीं हुए, लेकिन उन्होंने वीडियो संदेश जारी कर आंदोलन का समर्थन किया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और उनसे जुड़े लोगों की आलोचना करते हुए कहा कि वह एक दशक से अधिक समय से उनके खिलाफ लड़ रहे हैं और उनके राजनीतिक तौर-तरीकों को समझते हैं।
राहुल गांधी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार चाहे जितनी पुलिस तैनात कर ले और जितने नेताओं व युवाओं को हिरासत में ले, विपक्ष पीछे हटने वाला नहीं है। उन्होंने संविधान की रक्षा और जनता की आवाज उठाने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने युवाओं से विरोध जारी रखने की अपील करते हुए कहा कि वह उनके साथ खड़े हैं। राहुल गांधी के संदेश में मतदाता सूची से जुड़े विवाद और लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर विपक्ष की चिंताएं प्रमुख रहीं।
सीजेपी के तीन प्रमुख नेता विमान से हिरासत में लिए गए
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन की तैयारी के बीच सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके, सौरव दास और आशुतोष रांका को दिल्ली पहुंचने पर विमान से ही हिरासत में ले लिया गया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीनों मुंबई से दिल्ली पहुंचे थे और प्रस्तावित प्रदर्शन में शामिल होने वाले थे।
सीजेपी ने इस कार्रवाई का विरोध करते हुए कहा कि उसके नेताओं को प्रदर्शन स्थल तक पहुंचने से पहले ही रोक दिया गया। इसके बाद पार्टी ने राष्ट्रीय संगठन प्रभारी अजिंक्य शिंदे को आंदोलन की जिम्मेदारी सौंपने की घोषणा की।
पार्टी की ओर से समर्थकों से अपील की गई कि यदि उन्हें जंतर-मंतर पहुंचने से रोका जाए तो वे जहां रोके जाएं, वहीं शांतिपूर्ण तरीके से विरोध दर्ज कराएं। इससे दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में भी प्रदर्शन होने की संभावना बनी।
केजरीवाल और ममता बनर्जी भी हिरासत में
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल को भी जंतर-मंतर की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने हिरासत में लिया। हिरासत में लिए जाने के बाद जारी वीडियो संदेश में केजरीवाल ने कहा कि देश का युवा जाग चुका है और वोट चोरी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग दोहराई। आप नेता सौरभ भारद्वाज ने सोशल मीडिया पर पुलिस पर केजरीवाल के साथ धक्का-मुक्की करने का आरोप लगाया है।

तृणमूल कांग्रेस प्रमुख और पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को भी दिल्ली में हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई। टीएमसी प्रवक्ता साकेत गोखले के अनुसार, ममता बनर्जी सहित पार्टी के पांच लोगों को उनके आवास के बाहर से हिरासत में लिया गया। समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, ममता बनर्जी और पार्टी के अन्य नेताओं ने साउथ एवेन्यू स्थित बस स्टैंड पर धरना दिया था, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें हिरासत में लिया।
ममता बनर्जी ने कहा कि वे जंतर-मंतर जाना चाहते थे, लेकिन उन्हें जाने की अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने पुलिस की कार्रवाई की तुलना आपातकाल जैसे हालात से की।
नेहा बोरा को पुलिस ने हिरासत में लिया
ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और अन्य लोगों को हिरासत में लिया गया है। प्रशांत भूषण और योगेंद्र यादव भी दिखे। उनकी हिरासत वाली बस को सफदरजंग हवाई अड्डा फ्लाईओवर पर रोका गया।
सोनम वांगचुक ने 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया
सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने हिरासत में लिए गए प्रदर्शनकारियों और नेताओं की रिहाई की मांग करते हुए सरकार को 24 घंटे का अल्टीमेटम दिया। इंस्टाग्राम पर जारी वीडियो में उन्होंने कहा कि छात्र नेताओं, युवा नेताओं, वकीलों, पत्रकारों और सांसदों को हिरासत में लिए जाने की खबरें मिली हैं।
वांगचुक ने कहा कि यदि अगले 24 घंटे में हिरासत में लिए गए लोगों को रिहा नहीं किया गया तो वह भी शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन करने पर विचार करेंगे। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन धरने, अनशन या पदयात्रा के रूप में दिल्ली अथवा लेह में किया जा सकता है। उन्होंने मौजूदा हालात पर चिंता जताते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए।
वकीलों की हिरासत पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन ने जताई चिंता
दिल्ली में प्रदर्शन के दौरान सुप्रीम कोर्ट के कुछ वकीलों को हिरासत में लिए जाने पर सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रदीप राय ने आपत्ति जताई। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि वकीलों को उनके चौंबर से हिरासत में लिया जाना चिंताजनक है और इस मामले को भारत के मुख्य न्यायाधीश के समक्ष उठाया जाएगा।
उन्होंने हिरासत में लिए गए वकीलों को तत्काल रिहा करने की मांग करते हुए कहा कि वकीलों को मनमाने ढंग से हिरासत में लेने या डराने-धमकाने की कोशिश स्वीकार नहीं की जा सकती। रिपोर्टों के अनुसार, हिरासत में लिए गए लोगों में सुप्रीम कोर्ट की एडवोकेट-ऑन-रिकॉर्ड सुमिता हजारिका भी शामिल थीं।
बंगला साहिब के पास लाठीचार्ज का आरोप
गुरुद्वारा बंगला साहिब से जंतर-मंतर तक मार्च करने की कोशिश कर रहे प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर लाठीचार्ज करने और जबरन हिरासत में लेने का आरोप लगाया। प्रदर्शनकारियों के अनुसार, शुक्रवार से दिल्ली पहुंचे कई लोग गुरुद्वारे में ठहरे हुए थे। वहां मौजूद लोगों ने दावा किया कि शनिवार सुबह तक करीब 600 प्रदर्शनकारी मौजूद थे, जिनमें से लगभग 300 को हिरासत में लिया गया।
हैदराबाद से आए सॉफ्टवेयर इंजीनियर अजय जिंगाडे ने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों को जंतर-मंतर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया था और कुछ स्थानों पर लाठीचार्ज किया गया।
आंध्र प्रदेश के वारंगल से आए सीजेपी सदस्य चेतन प्रमोद ने भी आरोप लगाया कि पुलिसकर्मी गुरुद्वारे के गेट नंबर तीन से अंदर आए और प्रदर्शनकारियों को बाहर ले जाने लगे। उनके अनुसार, शांतिपूर्वक बैठे लोगों को भी हिरासत में लेने की कोशिश की गई।
पुलिस ने सड़को पर कीलें बिछाईं
सरकार ने प्रदर्शकारियों को जंतर-मंतर पर आने से रोकने के लिए यहां आने वाले रास्तो पर बैरिकेटिंग की है। साथ ही पुलिस व अर्धसैनिक बलो की भारी तैनाती की है। साथ ही सड़को पर कीले लगा दी है ताकि प्रदर्शनकारी आसानी से जंतर मंतर पर प्रदर्शन के लिए नहीं पहंुच सके।
मतदाता सूची के पुनरीक्षण को लेकर टकराव
पूरे विवाद के केंद्र में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग है। सीजेपी और विपक्ष के अन्य दलों का आरोप है कि मतदाता सूची में बदलाव से मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। विपक्ष ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाए हैं।








