गुलदार से सामना हुआ तो क्या करें ? : रेंजर महेश गौतम
वन्यजीव सप्ताह के तहत स्कूलों में चल रहा जागरूकता अभियान, बच्चों को सिखाए जा रहे वन्यजीवों से बचाव के तरीके


प्राकृतिक संतुलन में वन्यजीवों की भूमिका समझाई, निबंध प्रतियोगिता और पौधारोपण से दिया संरक्षण का संदेश
बिजनौर। जंगल और आबादी के बीच बढ़ते संपर्क के बीच वन्यजीवों के संरक्षण के साथ मानव-वन्यजीव संघर्ष से बचाव को लेकर वन विभाग ने स्कूलों में जागरूकता अभियान चलाया। वन्यजीव सप्ताह-2026 के तहत कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, धर्मनगरी में छात्राओं को वन्यजीवों के महत्व के साथ ’’गुलदार से बचाव के जरूरी तरीके’’ बताए गए। छात्राओं को समझाया गया कि वन्यजीवों से दूरी बनाए रखना और उनके प्राकृतिक आवास का संरक्षण ही संघर्ष को कम करने का सबसे प्रभावी उपाय है।
कार्यक्रम में शिक्षिकाओं और छात्राओं को वन्यजीवों की विभिन्न प्रजातियों, उनके प्राकृतिक आवास तथा पर्यावरणीय संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। विशेष रूप से गुलदार के संबंध में सावधानी बरतने, उसके दिखाई देने पर घबराकर उसके करीब नहीं जाने और सुरक्षित स्थान पर रहने जैसे उपायों के प्रति जागरूक किया गया।

बच्चों ने जाना, क्यों जरूरी हैं वन्यजीव
बिजनौर। वन्यजीव सप्ताह के तहत छह सितंबर को रूट्स इंटरनेशनल स्कूल में भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विद्यार्थियों को बताया गया कि वन्यजीव केवल जंगल की शोभा नहीं, बल्कि ’’प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र की महत्वपूर्ण कड़ी’’ हैं। इनके संरक्षण से पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में मदद मिलती है।
कार्यक्रम में प्रधानमंत्री का वन्यजीव सप्ताह संबंधी संदेश सुनाया गया। मुख्यमंत्री और वन मंत्री के संदेश भी विद्यार्थियों के समक्ष पढ़कर सुनाए गए। इसके बाद विद्यालय परिसर में पौधारोपण किया गया।

निबंध में उतरा वन्यजीव संरक्षण का संदेश
कक्षा छह से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए निबंध प्रतियोगिता आयोजित की गई। विद्यार्थियों ने वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण और प्रकृति के महत्व से जुड़े विषयों पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ संस्कार, मूल्यों और भारतीय संस्कृति से जुड़कर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया गया।
वन्यजीव सप्ताह के कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। आयोजकों ने कहा कि ’’वन्यजीवों की सुरक्षा केवल वन विभाग की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।’’




