बिजनौर, 7 अक्टूबर। जिलाधिकारी उमेश प्रताप सिंह ने बुधवार को राजकीय औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (आईटीआई), बिजनौर में जनगणना-2027 के अंतर्गत फील्ड ट्रेनर्स के प्रशिक्षण सत्र और जनगणना के द्वितीय चरण का शुभारंभ किया। उन्होंने फीता काटने के साथ मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्वलित किया। इस दौरान जिलाधिकारी ने जनगणना कार्य में लगे अधिकारियों और कर्मचारियों को इसे गंभीरता, निष्पक्षता और पूरी जिम्मेदारी के साथ संपादित करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना देश की महत्वपूर्ण संवैधानिक प्रक्रिया है। इससे प्राप्त आंकड़े देश और प्रदेश के विकास की योजनाओं, कल्याणकारी कार्यक्रमों, संसाधनों के वितरण तथा विभिन्न प्रशासनिक कार्यों के लिए आधार प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि जनगणना के आंकड़ों का उपयोग निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन सहित अन्य महत्वपूर्ण कार्यों में भी होता है। इसलिए इस कार्य में किसी भी स्तर पर लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
1872 से शुरू हुआ जनगणना का सफर
जिलाधिकारी ने जनगणना के ऐतिहासिक और विधिक पक्ष की जानकारी देते हुए बताया कि भारत में पहली जनगणना 1872 में कराई गई थी। जनगणना अधिनियम, 1948 इसके संचालन का प्रमुख विधिक आधार है। उनके अनुसार जनगणना-2027 वर्ष 1872 से अब तक भारत की 16वीं तथा स्वतंत्रता के बाद 8वीं जनगणना होगी।
उन्होंने बताया कि जनगणना के प्रथम चरण में मकान सूचीकरण एवं मकान गणना का कार्य किया गया है, जबकि द्वितीय चरण में जनसंख्या की गणना की जाएगी। जनसंख्या गणना का यह चरण 16 नवंबर से शुरू होगा।
जनगणना की जानकारी गोपनीय रखने का प्रावधान
प्रशिक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने जनगणना अधिनियम की विभिन्न धाराओं, विशेष रूप से धारा 4, 5, 8, 11 और 15 के संबंध में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि जनगणना कार्य से इनकार करना अथवा इसमें बाधा उत्पन्न करना अधिनियम के तहत दंडनीय है। उन्होंने बताया कि संबंधित प्रावधानों के तहत ऐसे मामलों में तीन वर्ष तक के कारावास अथवा एक हजार रुपये तक के जुर्माने अथवा दोनों का प्रावधान है।
धारा 15 का उल्लेख करते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जनगणना के दौरान नागरिकों से प्राप्त जानकारी को गोपनीय रखने का कानूनी प्रावधान है। उन्होंने आमजन से अपील की कि वे जनगणना कर्मियों को आवश्यक और सही जानकारी उपलब्ध कराकर इस राष्ट्रीय कार्य में सहयोग करें।
16 से 30 नवंबर तक स्व-गणना
अपर जिलाधिकारी वित्त एवं राजस्व एवं जिला जनगणना प्रभारी देवेंद्र पाल सिंह ने प्रशिक्षण कार्यक्रम की जानकारी देते हुए बताया कि 16 से 30 नवंबर तक स्व-गणना का कार्य किया जाएगा। इस दौरान आमजन से करीब 40 प्रकार के प्रश्नों के माध्यम से आवश्यक जानकारी प्राप्त की जाएगी।
उन्होंने बताया कि वर्तमान चरण में फील्ड ट्रेनर्स को प्रशिक्षित किया जा रहा है। प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद यही फील्ड ट्रेनर्स आगे प्रगणकों (एन्यूमैरेटर्स) को जनगणना प्रक्रिया, निर्धारित प्रपत्रों, विभिन्न चरणों, दायित्वों और तकनीकी पहलुओं के संबंध में प्रशिक्षण देंगे।
चार बैचों में होगा प्रशिक्षण
जनपद में फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण चार बैचों में कराया जा रहा है। प्रथम और द्वितीय बैच का प्रशिक्षण 7 से 9 अक्टूबर तथा तृतीय और चतुर्थ बैच का प्रशिक्षण 14 से 16 अक्टूबर तक आयोजित किया जाएगा। प्रशिक्षण के लिए जनपद में पांच मास्टर ट्रेनर्स नियुक्त किए गए हैं। कार्यक्रम में मास्टर ट्रेनर्स, फील्ड ट्रेनर्स तथा संबंधित अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।




