

नई दिल्ली,7 सितंबर। दिल्ली के सत्य निकेतन इलाके में पांच मंजिला इमारत गिरने की घटना के मामले में पुलिस ने सोमवार को भवन के कथित मालिक हरिराम को राजस्थान के भिवाड़ी से गिरफ्तार किया। दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तारी की पुष्टि की है। घटना के बाद दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) ने दक्षिणी जोन के पांच अधिकारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जानकारी देते हुए बताया कि सत्य निकेतन की घटना के बाद एमसीडी के डिप्टी कमिश्नर, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर, असिस्टेंट इंजीनियर और जूनियर इंजीनियर को निलंबित किया गया है। उन्होंने कहा कि बिना मंजूरी के बनी पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने का आदेश दिया गया है तथा आसपास के पीजी और अन्य इमारतों की भी जांच की जा रही है।
पांच एमसीडी अधिकारी निलंबित
निलंबित अधिकारियों में दक्षिणी जोन के डिप्टी कमिश्नर राकेश कुमार, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर रणवीर सिंह, एग्जीक्यूटिव इंजीनियर ललित कुमार गोयल, असिस्टेंट इंजीनियर (बिल्डिंग) सुनील चौहान और जूनियर इंजीनियर (बिल्डिंग) आशीष कुमार शामिल हैं। सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच में जो भी व्यक्ति दोषी या जिम्मेदार पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सात छात्रों की मौत का दावा
रविवार दोपहर गिरी पांच मंजिला इमारत में पीजी हॉस्टल संचालित होने की जानकारी सामने आई है। हादसे के बाद राहत एवं बचाव दल ने मलबे में फंसे लोगों की तलाश की। जानकारी अनुसार हादसे में मृत छात्रों की संख्या बढ़कर सात हो गई है।
एम्स के ट्रॉमा सेंटर की ओर से दी गई प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद 10 लोगों को ट्रॉमा सेंटर लाया गया था। इनमें पांच को अस्पताल पहुंचने से पहले ही मृत घोषित किया गया, जबकि गंभीर रूप से घायल एक व्यक्ति की उपचार के दौरान मौत हो गई थी। अन्य घायलों का उपचार किया जा रहा है और एक व्यक्ति को मामूली चोटों के बाद अस्पताल से छुट्टी दे दी गई।
अवैध निर्माण और पीजी व्यवस्था पर सवाल
हादसे के बाद भवन निर्माण की अनुमति, पांचवीं मंजिल के निर्माण और पीजी संचालन से संबंधित नियमों के पालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। दिल्ली सरकार ने बिना मंजूरी बनी पांचवीं मंजिल वाली इमारतों को सील करने और आसपास के पीजी तथा अन्य भवनों की जांच के निर्देश दिए हैं।
दिल्ली के मेयर प्रवेश वाही ने अधिकारियों के निलंबन को गंभीरता से लिया गया निर्णय बताया है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि जांच में किसी स्तर पर लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आने पर जिम्मेदारी तय की जाएगी।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी शुरू
हादसे के बाद इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी भी शुरू हो गई है। भाजपा नेताओं ने सरकार की कार्रवाई का समर्थन करते हुए इसे कड़ा कदम बताया है। दिल्ली सरकार के मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि जेई से लेकर डिप्टी कमिश्नर स्तर तक अधिकारियों का निलंबन स्पष्ट संदेश है कि नियमों के उल्लंघन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
भाजपा विधायक हरीश खुराना ने कहा कि सरकार की प्राथमिकता हादसे में घायल छात्रों का समुचित उपचार कराना और ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना है।
दूसरी ओर, आम आदमी पार्टी के नेता सौरभ भारद्वाज ने सत्य निकेतन क्षेत्र में पीजी और संपत्तियों को लेकर सरकार से विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने सरकार से छात्रों के लिए पर्याप्त हॉस्टल सुविधाएं विकसित करने की भी मांग की।
