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लम्पी का खतरा : बिजनौर में पशुओं की आवाजाही पर ’’ब्रेक’’

’’उत्तराखंड-हरियाणा में संक्रमण के बाद जिला प्रशासन अलर्ट, पशु बाजार बंद; डेयरी और पशुपालकों के लिए जारी हुई एडवाइजरी’’

विशेष रिपोर्ट : रवींद्र कुमार, समाचार संपादक
बिजनौर। सीमावर्ती राज्यों में तेजी से फैल रहे ’’लम्पी स्किन डिजीज (एलएसडी)’’ ने बिजनौर प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश में संक्रमण की पुष्टि तथा पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई जनपदों में मामले सामने आने के बाद जिला प्रशासन ने जिले में सख्त एहतियाती कदम उठाए हैं।

जिलाधिकारी ’’जसजीत कौर’’ ने गुरुवार को आदेश जारी करते हुए ’’अंतरराज्यीय गोवंश एवं भैंसवंशीय पशुओं के आवागमन पर तत्काल प्रभाव से रोक’’ लगा दी है। साथ ही जिले में लगने वाले ’’सभी पशु बाजारों और मेलों को अगले आदेश तक स्थगित’’ कर दिया गया है। बिजनौर उत्तराखंड की सीमा से सटा जिला है। ऐसे में पशुओं के माध्यम से संक्रमण फैलने की आशंका को देखते हुए प्रशासन ने इसे केवल पशु चिकित्सा विभाग का विषय न मानकर ’’जिले की पशुधन अर्थव्यवस्था की सुरक्षा का मामला’’ माना है।

’’क्या है लम्पी स्किन डिजीज?’’

लम्पी स्किन डिजीज गोवंश में फैलने वाला एक ’’वायरस जनित संक्रामक रोग’’ है। यह मुख्य रूप से मच्छर, मक्खी और अन्य रक्त चूसने वाले कीटों के माध्यम से फैलता है। संक्रमित पशु में तेज बुखार, शरीर पर गांठें, कमजोरी और दूध उत्पादन में कमी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। समय पर नियंत्रण न होने पर यह रोग पशुपालकों को भारी आर्थिक नुकसान पहुंचा सकता है।

’’संक्रमण रोकने के लिए चार स्तर पर निगरानी’’

जिलाधिकारी ने मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी को पूरे जिले में विशेष निगरानी अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। गांव-गांव पशुओं के स्वास्थ्य की निगरानी की जाएगी। जहां भी लम्पी रोग का संदिग्ध मामला मिलेगा, वहां तत्काल सैंपलिंग, उपचार, संक्रमित पशु को अलग रखने और आसपास के क्षेत्र में ’’रिंग वैक्सीनेशन’’ कराया जाएगा, ताकि संक्रमण आगे न फैल सके।

’’बाहरी राज्यों से आने वाले पशुओं पर सख्ती, टीकाकरण प्रमाण पत्र दिखाए बगैर नहीं मिलेगा प्रवेश’’

प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत भी यदि किसी राज्य से गोवंश बिजनौर लाया जाता है तो बिना ’’वैध टीकाकरण प्रमाण-पत्र’’ प्रवेश नहीं मिलेगा। संबंधित पशु का रिकॉर्ड ’’भारत पशुधन ऐप’’ पर दर्ज होना चाहिए तथा आधार और ईयर टैग का मिलान भी अनिवार्य रहेगा।

’’डेयरी कारोबार पर भी असर संभव’’

जिले में पशु बाजारों और पशुओं की आवाजाही पर रोक का सीधा असर डेयरी व्यवसाय, पशु व्यापार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है। हालांकि प्रशासन का कहना है कि यह निर्णय केवल संक्रमण की रोकथाम के उद्देश्य से लिया गया है और स्थिति सामान्य होते ही प्रतिबंधों की समीक्षा की जाएगी।

’’पशुपालकों से प्रशासन की अपील’’

प्रशासन ने पशुपालकों से अपील की है कि यदि किसी पशु में तेज बुखार, त्वचा पर गांठें, आंख या नाक से स्राव, दूध उत्पादन में कमी अथवा भोजन छोड़ने जैसे लक्षण दिखाई दें तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखें और तत्काल नजदीकी पशु चिकित्सालय को सूचना दें। बीमार पशु की खरीद-फरोख्त या आवाजाही पूरी तरह रोकने को कहा गया है।

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