नई दिल्ली। डिजिटल अर्थव्यवस्था और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के तेजी से बदलते दौर में देश के कॉर्पोरेट नेतृत्व में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता पर बल देते हुए दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कहा है कि अब समय आ गया है कि कंपनियों के बोर्डरूम में नई पीढ़ी को भी निर्णय लेने का अवसर मिले। एसोसिएशन का मानना है कि भारत की युवा प्रतिभा को नेतृत्व का अवसर देकर ही देश वैश्विक नवाचार और तकनीकी प्रतिस्पर्धा में अग्रणी बन सकता है।
एसोसिएशन ने बताया कि नवंबर 2025 में उसके संघपिता एवं प्रख्यात अर्थशास्त्री डॉ. जितेन्द्र पासवान ने कॉर्पोरेट कार्य मंत्रालय, वाणिज्य मंत्रालय तथा लोक उद्यम विभाग, भारत सरकार को सुझाव दिया था कि कंपनियों के बोर्डरूम में युवाओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए, ताकि नई सोच, तकनीकी दक्षता और नवाचार को संस्थागत स्तर पर स्थान मिल सके।
एसोसिएशन ने द इकोनॉमिक्स टाइम्स में प्रकाशित समाचार का उल्लेख करते हुए संयुक्त संसदीय समिति द्वारा कंपनी अधिनियम में संशोधन की उस सिफारिश का स्वागत किया है, जिसमें मैनेजिंग डायरेक्टर अथवा फुल-टाइम डायरेक्टर बनने की न्यूनतम आयु 21 वर्ष से घटाकर 18 वर्ष किए जाने का प्रस्ताव रखा गया है। एसोसिएशन का कहना है कि यह कदम भारतीय उद्योग जगत में नई ऊर्जा और नेतृत्व क्षमता का संचार करेगा।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के अनुसार, आज का डिजिटल युग यह सिद्ध कर चुका है कि नेतृत्व केवल आयु या लंबे अनुभव का विषय नहीं है, बल्कि नवाचार, तकनीकी समझ और दूरदृष्टि अधिक महत्वपूर्ण है। विश्व की अनेक अग्रणी कंपनियों की स्थापना युवा उद्यमियों ने कम आयु में ही की और उन्होंने वैश्विक व्यापार की दिशा बदल दी। भारत के युवा भी स्टार्टअप, डिजिटल प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में लगातार नई सफलताएँ अर्जित कर रहे हैं।
एसोसिएशन का कहना है कि प्रबंधन का व्यावहारिक अनुभव कार्य करते हुए प्राप्त किया जा सकता है तथा आवश्यक होने पर अनुभवी पेशेवरों का सहयोग भी लिया जा सकता है। इसलिए प्रतिभाशाली युवाओं को केवल आयु के आधार पर नेतृत्व से वंचित करना उचित नहीं होगा।
एसोसिएशन ने यह भी कहा कि भारत विश्व की सबसे युवा आबादी वाले देशों में शामिल है। यदि देश को तकनीकी महाशक्ति बनने का लक्ष्य प्राप्त करना है तो कॉर्पोरेट गवर्नेंस में पीढ़ीगत और लैंगिक विविधता को बढ़ावा देना होगा। विशेष रूप से AI, डिजिटल टेक्नोलॉजी और टेक स्टार्टअप के क्षेत्र में युवाओं को शीघ्र अवसर उपलब्ध कराना समय की मांग है।
दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन की मुख्य वित्तीय प्रबंधन अधिकारी डॉ. स्वाति श्रीवास्तव ने कहा कि संयुक्त संसदीय समिति की सिफारिशों को शीघ्र लागू किया जाना चाहिए, ताकि भारत के प्रतिभाशाली युवा कॉर्पोरेट नेतृत्व में अपनी भूमिका निभा सकें और उद्योग जगत को नई दिशा प्रदान कर सकें। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह पहल कॉर्पोरेट गवर्नेंस को अधिक समावेशी, आधुनिक और भविष्य उन्मुख बनाएगी।
