
राष्ट्रीय पंचायत विशेष संवाददाता
बिजनौर। जनपद बिजनौर में उच्चीकृत ’’कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों’’ में शिक्षकों एवं गैर-शिक्षण कर्मचारियों की भर्ती प्रक्रिया अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गई है। वर्ष 2024 में विज्ञापित पदों के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए थे, लेकिन लगभग दो वर्ष बीत जाने के बावजूद नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी तरीके से पूरी नहीं हो सकी। चयन सूची, मेरिट, अंक निर्धारण और विद्यालय आवंटन जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां सार्वजनिक न होने से अभ्यर्थियों में असंतोष बढ़ता जा रहा है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि ’’यदि चयन मेरिट के आधार पर हुआ है, तो मेरिट सूची आज तक सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?’’
’’आठ विद्यालयों के उच्चीकरण के बाद निकले थे पद’’
शासन द्वारा बिजनौर के ’’धर्मनगरी, किरतपुर ग्रामीण, किरतपुर नगर, जलीलपुर, नजीबाबाद नगर, नगीना नगर, बुढ़नपुर स्योहारा तथा फॉरेस्ट विलेज कल्लूवाला’’ स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों का उच्चीकरण किया गया। इसके बाद इन विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक अध्ययन शुरू कराने के लिए ’’प्रधानाचार्य, पीजीटी शिक्षक, लैब असिस्टेंट, कंप्यूटर प्रशिक्षक, सहायक रसोइया, चौकीदार, चपरासी सहित विभिन्न पदों’’ पर भर्ती की प्रक्रिया शुरू की गई। भर्ती का विज्ञापन प्रकाशित हुआ, अभ्यर्थियों ने आवेदन किए, लेकिन उसके बाद पूरी प्रक्रिया धीरे-धीरे अस्पष्ट होती चली गई।
’’मेरिट सूची गायब, चयन का आधार भी स्पष्ट नहीं’’
भर्ती प्रक्रिया में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज ’’मेरिट सूची’’ होती है। इसी से पता चलता है कि किस अभ्यर्थी को कितने अंक मिले और किस आधार पर चयन हुआ। लेकिन इस भर्ती में न तो विभागीय वेबसाइट पर मेरिट प्रकाशित हुई, न नोटिस बोर्ड पर अंक प्रदर्शित किए गए और न ही अभ्यर्थियों को यह जानकारी दी गई कि उनका चयन या असफलता किस आधार पर हुई। ऐसे में अभ्यर्थियों के बीच यह सवाल लगातार उठ रहा है कि-
– मेरिट कैसे बनी?
– अनुभव के अंक किसे मिले?
– शैक्षणिक अंकों का मूल्यांकन कैसे किया गया?
– आरक्षण का पालन किस प्रकार हुआ?
इन प्रश्नों का अब तक कोई अधिकृत उत्तर उपलब्ध नहीं है।
’’30 अप्रैल को बुलाया गया, लेकिन क्यों?’’
सूत्रों के अनुसार ’’30 अप्रैल 2026’’ को कई अभ्यर्थियों को बीएसए कार्यालय में दस्तावेज सत्यापन के लिए बुलाया गया। हैरानी की बात यह रही कि किसे बुलाया गया? किस मेरिट के आधार पर बुलाया गया? कितने अभ्यर्थियों को बुलाया गया? इस संबंध में कोई सार्वजनिक सूचना जारी नहीं की गई। बताया जाता है कि अधिकांश अभ्यर्थियों को केवल मोबाइल फोन पर सूचना देकर कार्यालय बुलाया गया।
’’मुख्यमंत्री के कार्यक्रम में बांटे गए नियुक्ति पत्र, तब खुला मामला’’
17 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बिजनौर दौरे के दौरान कुछ चयनित अभ्यर्थियों को मंच से नियुक्ति पत्र प्रदान किए गए। इसके बाद स्थानीय पत्रकारों ने अधिकारियों से पूछा कि ’’जब नियुक्ति पत्र दिए जा रहे हैं तो चयन सूची और मेरिट कहां है?’’ बताया जाता है कि इसी प्रश्न के बाद आनन-फानन में बीएसए कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चयनित अभ्यर्थियों की सूची चस्पा की गई। लेकिन, उसमें भी ’’मेरिट अंक, चयन का आधार और प्रतीक्षा सूची’’ का कोई उल्लेख नहीं था।
’’29 जुलाई की काउंसिलिंग भी छोड़ गई कई सवाल’’
29 जुलाई को विकास भवन सभागार में चयनित अभ्यर्थियों को विद्यालय आवंटन के लिए बुलाया गया। दिनभर चली प्रक्रिया के बाद भी विद्यालय आवंटन नहीं हुआ। अंत में अभ्यर्थियों से कहा गया कि- ’’15 दिन बाद नियुक्ति पत्र डाक से भेज दिए जाएंगे।’’ अब सवाल यह है कि यदि विद्यालय आवंटन नहीं हुआ तो नियुक्ति पत्र किस विद्यालय के लिए जारी होंगे? क्या दोबारा काउंसिलिंग होगी? या फिर विद्यालयों का आवंटन विभाग अपने स्तर पर करेगा?
’’शासन की चयन प्रक्रिया क्या कहती है?’’
सरकारी भर्ती नियमों के अनुसार सामान्यतः चयन प्रक्रिया में शैक्षणिक योग्यता के अंक, प्रशिक्षण योग्यता, अनुभव (यदि लागू हो), आरक्षण, दस्तावेज सत्यापन के आधार पर मेरिट तैयार की जाती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ’’मेरिट सूची सार्वजनिक करना पारदर्शिता का मूल आधार माना जाता है।’’
’’अभ्यर्थियों में बढ़ रही नाराजगी’’
कई अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि चयन निष्पक्ष हुआ है तो मेरिट सूची सार्वजनिक करने में विभाग को क्या आपत्ति है? उनका कहना है कि चयन प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए ताकि किसी भी प्रकार के विवाद की स्थिति न बने।
’’वर्धमान कॉलेज भर्ती विवाद से हो रही तुलना’’
स्थानीय स्तर पर इस भर्ती की तुलना वर्ष 2023-24 में चर्चित रहे ’’वर्धमान कॉलेज सहायक प्रोफेसर भर्ती विवाद’’ से भी की जा रही है। हालांकि दोनों मामलों की परिस्थितियां अलग हैं, लेकिन पारदर्शिता को लेकर उठ रहे सवालों के कारण अभ्यर्थी समानता की चर्चा कर रहे हैं।
’’अब उठ रहे हैं ये प्रमुख सवाल’’
– दो वर्ष बाद भी भर्ती प्रक्रिया पूरी क्यों नहीं हुई?
– मेरिट सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गई?
– दस्तावेज सत्यापन के लिए अभ्यर्थियों का चयन किस आधार पर हुआ?
– नियुक्ति पत्र जारी करने से पहले अंतिम चयन सूची क्यों नहीं प्रकाशित की गई?
– विद्यालय आवंटन की स्पष्ट प्रक्रिया क्या है?
– क्या विभाग पूरी चयन प्रक्रिया सार्वजनिक करेगा?
अधिकारी कहिन…
इस संबंध में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी तथा चयन प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों का पक्ष जानने का प्रयास किया गया। समाचार लिखे जाने तक उनका कोई आधिकारिक उत्तर प्राप्त नहीं हो सका। यदि विभाग अपना पक्ष उपलब्ध कराता है तो उसे प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।


