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किसानों को गन्ने की फसल में सही समय पर दवाइयों के उचित इस्तेमाल की दी जानकारी 

-वैज्ञानिक डॉ. अवधेश डागर ने किनौनी चीनी मिल क्षेत्र के गन्ने के खेतों का किया निरीक्षण

मेरठ, 04 जून। किनौनी चीनी मिल मेरठ में मुजफ्फरनगर गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. अवधेश डागर ने और चीनी मिल के गन्ना महाप्रबंधक जयवीर सिंह के साथ बुधवार को चीनी मिल क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने चीनी मिल क्षेत्र के किसानों के गन्ने के खेतों का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ डेवलपमेंट इंचार्ज आदेश तोमर, गेट इंचार्ज मनीष दहिया, पूठ जोन इंचार्ज सुरेंद्र सिंह तोमर और आशीष कुमार त्यागी आदि थे।

गन्ना किसानों को मुख्य रूप से समय रहते सही समय पर सही मात्रा में सही दवाइयों के प्रयोग की जानकारी दी गई। पौधे गन्ने में चोटी बेधक अथवा टोप बोरर कीट के नियंत्रण के लिए फेरोमोन ट्रैप, लाइट ट्रैप, स्टिकी ट्रैप आदि को लगाने के साथ-साथ 150 एमएल कोराजन अथवा 50 एमएल ट्वेंटा प्रति एकड़ की दर से 400 लीटर पानी में कम से कम 27 टंकी के माध्यम से ड्रैचिंग की जानकारी दी गई। पेड़ी की फसल में चोटी बेधक अथवा टोप बोरर कीट के नियंत्रण के लिए 1.5 किलोग्राम प्रति बीघा की दर से फरटेरा के प्रयोग की जानकारी किसानों को दी गई।

इस दौरान लाल सड़न, पोक्का बोइंग, स्मट के नियंत्रण लिए स्प्रे में एज़ोक्सीस्ट्रोबिन 18.2% + डिफ़ेनोकोनाज़ोल 11.4% की 200 एमएल प्रति एकड़ की दर से स्प्रे की जानकारी दी गई। (यह स्प्रे किनौनी चीनी मिल के पूठ जोन के क्षेत्रीय गन्ना कार्यालय पर अजाका डुओ के नाम से उपलब्ध है) और जमीन में से लाल सड़न को कंट्रोल करने के लिए ट्राइकोडर्मा 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग की सलाह दी। इस अवसर पर किसानों के काम 2 लीटर प्रति एकड़ की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग की सलाह दी गई। चिंच बग के नियंत्रण के लिए क्लोरपाइरीफोस 10% जी का प्रयोग 2 किलोग्राम प्रति बीघा की दर से करने का सुझाव दिया गया।

किसानों को आगामी सत्र में केवल और केवल ट्रेंच विधि से ही गन्ना बुवाई करने पर जोर दिया गया। आगामी समय में को-0238 गन्ना प्रजाति की बुवाई बिल्कुल भी न करने पर जोर दिया गया और इसके स्थान पर अन्य स्वीकृत करना प्रजातियों की ही बुवाई करने को कहा गया क्योंकि को-0238 गन्ना प्रजाति में कीटों और बीमारियों का मुख्य रूप से लाल सड़न का प्रकोप बढ़ता जा रहा है और इस गन्ना प्रजाति की उम्र भी पूरी हो चुकी है।
गन्ना फसल सुरक्षा के लिए सभी आवश्यक दवाईयां पूठ जोन के क्षेत्रीय गन्ना कार्यालय पर उपलब्ध हैं।

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