राष्ट्रीय पंचायत | विशेष संवाददाता
त्योहारों में केवल खरीदारी करने वाले ग्राहक नहीं, बल्कि सामान बेचकर कमाई करने वाले विक्रेता भी बनें। कर्ज लेकर या अपनी जमा पूंजी खर्च करके उत्सव मनाने के बजाय कमाई के साथ त्योहार मनाएं। यह संदेश दलित इंडस्ट्रीज एसोसिएशन के डॉ. जितेन्द्र पासवान ने समुदाय के सदस्यों को दिया है। उन्होंने एससी-एसटी समुदाय से बाजार, व्यापार और पूंजी के महत्व को समझते हुए आर्थिक रूप से मजबूत बनने का आह्वान किया।
डॉ. पासवान ने अपने संदेश में कहा कि त्योहारों और उत्सवों के दौरान बाजार में खरीदारी बढ़ती है। इस दौरान जहां व्यापारी और उद्योगपति अपने कारोबार से लाभ कमाते हैं, वहीं अनेक परिवार अपनी बचत खर्च कर देते हैं या कर्ज लेकर उत्सव मनाते हैं। ऐसे में प्रत्येक व्यक्ति को स्वयं मूल्यांकन करना चाहिए कि त्योहार के बाद उसकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर हुई है या कमजोर।
उत्सव मनाएं, लेकिन आर्थिक नुकसान उठाकर नहीं
डॉ. पासवान ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य लोगों को पर्व-त्योहारों से दूर रहने की सलाह देना नहीं है, बल्कि उत्सव मनाने के तरीके में आर्थिक समझदारी लाने का है। उनका कहना है कि त्योहारों की खुशियों के साथ परिवार की आर्थिक सुरक्षा भी जरूरी है। इसके लिए अनावश्यक खर्च और कर्ज से बचना चाहिए तथा अपनी आय के अनुरूप ही खरीदारी करनी चाहिए।
उन्होंने समुदाय के लोगों से अपील की कि वे त्योहारों के बाजार में केवल उपभोक्ता बनकर न रहें, बल्कि अपनी क्षमता के अनुसार छोटे व्यापार, घरेलू उद्योग, हस्तशिल्प, खाद्य उत्पादों और स्थानीय वस्तुओं की बिक्री जैसे अवसरों का लाभ भी उठाएं।
बाजार की समझ से मजबूत होगी आर्थिक स्थिति
डॉ. पासवान ने बाजारवाद और उदारीकरण के दौर में पूंजी, कारोबार तथा आर्थिक संसाधनों के महत्व पर जोर दिया। उनके अनुसार, समुदाय की वास्तविक प्रगति के लिए केवल खर्च करने की क्षमता बढ़ाना पर्याप्त नहीं है, बल्कि आय के नए स्रोत विकसित करना, बचत करना और पूंजी का उत्पादक उपयोग करना भी जरूरी है।
उन्होंने उद्योग, व्यापार और स्वरोजगार को आर्थिक सशक्तीकरण के महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए लोगों से उद्यमशीलता विकसित करने का आह्वान किया। उनका संदेश है कि आर्थिक रूप से मजबूत बनने के लिए लोगों को बाजार की कार्यप्रणाली समझनी होगी और अवसरों को पहचानकर उनका लाभ उठाना होगा।
ग्राहक से आगे बढ़कर उद्यमी बनने का आह्वान
डॉ. जितेन्द्र पासवान का यह संदेश SC-ST समुदाय में आर्थिक जागरूकता, स्वरोजगार और उद्यमिता को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। त्योहारों के दौरान स्थानीय उत्पादों की बिक्री, छोटे कारोबार को बढ़ावा देने और जिम्मेदारी से वित्तीय निर्णय लेने पर जोर देकर परिवारों की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है।
डॉ. जितेन्द्र पासवान का मूल संदेश है—“ग्राहक नहीं, विक्रेता बनो।” अर्थात त्योहारों को केवल खर्च करने का अवसर न मानें, बल्कि उन्हें कमाई, बचत, कारोबार के विस्तार और आर्थिक आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने का माध्यम बनाएं।


