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संत समण दास महाराज के जात दिवस पर आश्रम में गूंजा संतों की वाणी का संदेश

लायकपुरी के संत सिरोमणि रविदास आश्रम में श्रद्धालुओं ने केक काटकर मनाया जात दिवस, संतों ने मानव कल्याण और सामाजिक एकता का दिया संदेश

मंडावर/बिजनौर। ग्राम लायकपुरी, मंडावर स्थित संत सिरोमणि रविदास आश्रम में महात्मा संत समण दास महाराज का जात दिवस श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में अनुयायी और संत मौजूद रहे। इस अवसर पर अनुयायियों ने केक काटकर संत समण दास महाराज को स्मरण किया तथा उनकी वाणी का गायन किया।

कार्यक्रम में संतों ने अपने संबोधन में कहा कि संतों का जीवन त्याग, संघर्ष और मानव कल्याण के लिए समर्पित रहा है। वक्ताओं ने महासमण बुद्ध, संत रविदास, संत कबीर और डॉ. भीमराव आंबेडकर सहित अनेक महापुरुषों के जीवन और विचारों का उल्लेख करते हुए समाज में समानता, मानव कल्याण और सामाजिक जागरूकता के महत्व पर प्रकाश डाला।

‘संत परंपरा और विरासत को आगे बढ़ाएं’

समण वेद प्रकाश और समण गजेंद्र सिंह ने उपस्थित लोगों से अपनी संत परंपरा और सामाजिक विरासत को पहचानने तथा उसे आगे बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि समाज के लोगों को जातिगत पहचान से ऊपर उठकर ‘महासमण रविदास कुल’ की पहचान को आगे बढ़ाने और इसे संगठित एवं मजबूत करने के लिए प्रयास करना चाहिए।

वक्ताओं ने कहा कि संतों की विचारधारा और विरासत को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए सामाजिक स्तर पर जागरूकता और संगठनात्मक प्रयास आवश्यक हैं।

समण संघ की गतिविधियों की दी जानकारी

कार्यक्रम में समण संघ की गतिविधियों के बारे में भी जानकारी दी गई। वक्ताओं के अनुसार, समण संघ संतों से जुड़े विभिन्न समूहों और संगठनों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। वक्ताओं ने संगठन से जुड़े 29 लाख संगठनों को एकजुट करने के प्रयास का भी उल्लेख किया।

वक्ताओं ने यह भी दावा किया कि पिछले पांच वर्षों के दौरान समण संघ ने देश के विभिन्न क्षेत्रों में लोगों तक पहुंच बनाने के लिए काम किया है। हालांकि, कार्यक्रम में बताए गए संगठन संबंधी आंकड़े और दावे आयोजकों/वक्ताओं की ओर से प्रस्तुत किए गए।

समाज के लोगों से संगठन की गतिविधियों में भाग लेने की अपील करते हुए बताया गया कि प्रतिदिन रात 8 बजे से 10:30 बजे तक Zoom के माध्यम से बैठक आयोजित की जाती है। वक्ताओं ने अधिक से अधिक लोगों से इन बैठकों से जुड़ने का आह्वान किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित श्रद्धालुओं और संतों के लिए भोजन की व्यवस्था की गई। आयोजन का समापन सामाजिक एकता, संत परंपरा और मानव कल्याण के संदेश के साथ हुआ।

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