नई दिल्ली, 25 सितंबर| कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दीपके ने विपक्षी दलों से अपील की है कि यदि उन्हें चुनावी प्रक्रिया में धांधली की आशंका है, तो वे ऐसे चुनावों में हिस्सा लेना बंद करें। दीपके का कहना है कि कथित तौर पर धांधली वाले चुनावों में लगातार भागीदारी से उस प्रक्रिया को वैधता मिलती है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव की धारणा बनी रहती है।
दीपके ने शुक्रवार को कहा कि विपक्षी दल एक ओर चुनावों में गड़बड़ी के आरोप लगाते हैं और दूसरी ओर उन्हीं चुनावों में भाग लेते हैं। उन्होंने राजनीतिक दलों से चुनावी प्रक्रिया को लेकर अपना रुख स्पष्ट करने की अपील की।
ज्ञानेश कुमार को शनिवार तक इस्तीफे का अल्टीमेटम
सीजेपी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए उन्हें शनिवार तक का समय दिया है। पार्टी ने कहा है कि यदि इस्तीफा नहीं दिया गया तो 2 अक्टूबर, गांधी जयंती से मुंबई से राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू किया जाएगा, जिसे बाद में देश के अन्य शहरों तक ले जाने की योजना है। दीपके ने कहा कि आंदोलन का उद्देश्य चुनावी प्रक्रिया और लोकतांत्रिक संस्थाओं से जुड़े मुद्दों को उठाना है।
सीजेपी की तीन प्रमुख मांगें
सीजेपी ने अपनी मांगों में- मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की मांग की है। विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) पर रोक लगाने और जनवरी 2025 की मतदाता सूची बहाल करने की मांग की है। 2023 के निर्वाचन संबंधी कानून को रद्द करने तथा निर्वाचन आयोग में सुधार की मांग रखी है।
निर्वाचन आयोग में असहमति की रिपोर्ट के बाद बढ़ा विवाद
यह मामला ऐसे समय सामने आया है जब द इंडियन एक्सप्रेस की 23 सितंबर की एक रिपोर्ट में दावा किया गया कि निर्वाचन आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार आयोग के कुछ फैसलों और आदेशों पर औपचारिक आपत्ति दर्ज की। रिपोर्ट के मुताबिक, इन आपत्तियों का संबंध मतदाता सूची में नाम जोड़ने, हटाने और बहाल करने तथा मतदाता पंजीकरण प्रक्रिया और निर्वाचन संबंधी डिजिटल व्यवस्था से था।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि दोनों निर्वाचन आयुक्तों ने कुछ फैसलों में उन्हें जानकारी नहीं दिए जाने और निर्वाचन सूची से संबंधित डिजिटल व्यवस्था में केंद्रीकरण को लेकर सवाल उठाए थे। वहीं, निर्वाचन आयोग ने संस्थागत मतभेद या टूट की धारणा को खारिज करते हुए कहा है कि बहु-सदस्यीय संवैधानिक संस्था में अलग-अलग विचार और आंतरिक प्रक्रियाएं निर्णय प्रक्रिया का हिस्सा हैं।
चुनाव बहिष्कार की अपील पर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं
दीपके की चुनाव बहिष्कार की अपील पर विपक्षी दलों की ओर से फिलहाल कोई सामूहिक निर्णय सामने नहीं आया है। कुछ नेताओं ने चुनावों का बहिष्कार करने से संभावित राजनीतिक नुकसान को लेकर चिंता जताई है, जबकि कुछ नेताओं ने निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली की स्वतंत्र जांच की मांग का समर्थन किया है।
पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाई कुरैशी ने भी 48 घंटे के अल्टीमेटम पर कहा है कि मुख्य चुनाव आयुक्त
उनकी बात मानने वाले नहीं हैं। शिक्षा मंत्री के मामले में ऐसा संभव था। सरकार के जरिये उन पर दबाव डाला जा सकता था। केंद्र सरकार मुख्य चुनाव आयुक्त को मजबूर नहीं कर सकती। वह केवल महाभियोग के जरिये पद से हटा सकती है। उन्होंने कहा कि मुझे समझ में नहीं आ रहा कि 48 घंटे का नोटिस काम कैसे करेगा।


