
नजीबाबाद/लखनऊ। पालि भाषा सीखने और बौद्ध साहित्य के मूल स्रोतों को समझने के इच्छुक विद्यार्थियों के लिए आवेदन का अंतिम अवसर है। केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, लखनऊ परिसर द्वारा संचालित व्यावहारिक पालि व्याकरण डिप्लोमा प्रोग्राम (DPAPG) के तृतीय चरण के प्रवेश के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम तिथि 25 सितम्बर 2026 की रात्रि 11:59 बजे निर्धारित की गई है।
यह कार्यक्रम विशेष रूप से उन विद्यार्थियों और पालि भाषा में रुचि रखने वाले लोगों के लिए उपयोगी है, जो प्रारम्भिक स्तर से पालि भाषा एवं व्याकरण का अध्ययन करना चाहते हैं। कार्यक्रम में हिन्दी माध्यम से अध्ययन की सुविधा उपलब्ध है और विद्यार्थी घर बैठे ऑनलाइन माध्यम से अध्ययन कर सकते हैं।
त्रिपिटक के मूल पाठों को समझने में सहायक
पालि बौद्ध धर्म के प्रमुख ग्रंथों और त्रिपिटक साहित्य की मूल भाषा है। पालि भाषा के अध्ययन से विद्यार्थी बौद्ध साहित्य, बुद्ध के उपदेशों और प्राचीन बौद्ध ज्ञान-परम्परा को मूल पाठों के माध्यम से समझने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
DPAPG कार्यक्रम में प्रारम्भिक स्तर से पालि व्याकरण के अध्ययन पर जोर दिया गया है। विद्यार्थियों को विशेषज्ञ आचार्यों के मार्गदर्शन में पालि भाषा सीखने का अवसर मिलेगा।
आज ही करें ऑनलाइन आवेदन
प्रवेश के तृतीय चरण के लिए ऑनलाइन आवेदन की अंतिम समय सीमा 25 सितम्बर 2026, रात्रि 11:59 बजे तक है। इच्छुक अभ्यर्थी निर्धारित प्रवेश पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं।
ऑनलाइन प्रवेश पोर्टल:
https://sanskritadm.samarth.edu.in
DPAPG पाठ्यक्रम:
https://sanskrit.ac.in/syllabus_2027/pdf/Diploma/Diploma_Pali_Grammar.pdf
प्रमाणपत्र एवं डिप्लोमा कार्यक्रमों की नियमावली:
https://sanskrit.ac.in/syllabus_2027/pdf/Certificate_Diploma_and_PG_Diploma_Guidelines.pdf
तृतीय चरण प्रवेश अधिसूचना:
https://www.sanskrit.nic.in/uploads/2026_08_04_Notification_558.pdf
इच्छुक अभ्यर्थी आवेदन करने से पहले संबंधित प्रवेश अधिसूचना, पाठ्यक्रम और नियमावली का अवलोकन कर लें। आवेदन की अंतिम समय सीमा निकट होने के कारण अभ्यर्थियों को समय रहते ऑनलाइन आवेदन पूरा करने की सलाह दी गई है।
पालि अध्ययन से जुड़े विद्यार्थियों के लिए उपयोगी पहल
पालि भाषा के अध्ययन में रुचि रखने वाले विद्यार्थियों के लिए इस प्रकार के ऑनलाइन कार्यक्रम घर बैठे भाषा सीखने का अवसर उपलब्ध कराते हैं। पालि सीखने के साथ विद्यार्थी बौद्ध साहित्य और त्रिपिटक के मूल पाठों के अध्ययन की दिशा में अपनी शैक्षिक तैयारी को आगे बढ़ा सकते हैं।



